
चंबल में घडिय़ालों के घर मेें घट रहा गैंगेटिक डॉल्फिन का कुनबा
श्येपुर,
घडिय़ालों के लिए संरक्षित राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में राष्ट्रीय जलीय जीव गेंगेटिक डॉल्फिन का कुनबा बढऩे के बजाय घट रहा है। अभयारण्य में हुए जलीय जीवों के वार्षिक सर्वें में इस बार डॉल्फिन की संख्या 68 मिली है। जो न केवल गत वर्ष से कम है, बल्कि बीते छह सालों में भी सबसे कम है।
विलुप्त होती घडिय़ाल की प्रजाति को संरक्षित करने के लिए वर्ष 1978 में राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य की स्थापना की गई। यहां घडिय़ालों के संरक्षण के साथ ही अन्य जलीय जीव भी संरक्षण पा रहे हैं, इसी में है राष्ट्रीय जलीय जीव गेंगेटिक डॉल्फिन। यूं तो बीते बीते एक दशक में चंबल में डॉल्फिन की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन अब बीते छह सालों से संख्या लगातार घट रही है। गत फरवरी में हुए जलीय जीवों के सर्वे में 68 डॉल्फिन मिली थी, जबकि गत वर्ष 2019 में ये 74 की संख्या में थी। इससे पहले भी वर्ष 2018 में 74, वर्ष 2017 में 75, 2016 में 78 और 2015 में 71 डॉल्फिन पाई गई थी। जाहिर है कि बीते पांच-छह सालों से डॉल्फिन की संख्या घट रही है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जलीय जीव गेंगेटिक डॉल्फिन मुख्य रूप से गंगा में पाया जाने वाला जलीय जीव है और मध्यप्रदेश में ये केवल चंबल नदी में मिलती है। डीएफओ चंबल अभयारण्य मुरैना बिजेंद्र झा का कहना है कि इस बार के सर्वे में 68 डॉल्फिन आई है, कम होने के कारणों की समीक्षा की जाएगी।
डॉल्फिन में ये खास-खास
-डॉल्फिन को हिंदी में सूंस नाम से जाना जाता है।
-पानी की सतह पर एक से डेढ़ फीट की छलांग लगाती है।
-नर डॉल्फिन की लंबाई 170 सेमी और 200 सेमी तक होती है।
-गहरे पानी वाले क्षेत्र डॉल्फिन के रहवास रहते हैं।
बीते 9 सालों में चंबल में डॉल्फिन की संख्या
वर्ष डॉल्फिन
2020 68
2019 74
2018 74
2017 75
2016 78
२०१५ ७१
२०१४ ६६
२०१३ ५९
२०१२ ५६
Published on:
19 Mar 2020 07:00 am
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