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देखते रह गए अफसर,दम तोड़ गए अंग्रेजी स्कूल

पांच साल पहले गरीब बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिलाने जिले में खोले गए थे दस अंग्रेजी माध्यम के स्कूल

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देखते रह गए अफसर,दम तोड़ गए अंग्रेजी स्कूल

श्योपुर । सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले गरीबों के बच्चे भी इंग्लिश मीडियम जैसे स्कूलों की तरह पड़े और गरीब बच्चे निजी स्कूलों के बच्चों की तरफ फर्राटे से अंग्रेजी बोल सके, इसके लिए शिक्षा विभाग ने श्योपुर विकासखंड में सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गए,मगर यह इंग्लिश मीडियम स्कूल चलने से पहले ही दम तोड़ गए।


खास बात यह है कि जिन सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गए थे। उन स्कूलों में इनका न सिर्फ प्रचार-प्रसार किया गया, बल्कि अंग्रेजी माध्यम की किताबे भी भेजी गई, लेकिन इसके बाद भी इन स्कूलों में एक भी दिन इंग्लिश मीडियम से बच्चों को पढ़ाने के लिए क्लासे नहीं लगी। मगर इस दिशा में न तो विभागीय अफसर कुछ कर सके और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।


यहां खोले गए इंग्लिश मीडियम स्कूल
शिक्षा विभाग के द्वारा वर्ष 2015-16 में श्योपुर ब्लॉक के पांच सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से बच्चों की पढ़ाई करवाने के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गए। जिनमें शामावि चंबल कॉलोनी, शामावि नागदा, शामावि रायपुरा, शामावि पांडोला, शामावि कन्या बड़ौदा, शामिल है। ये अंग्रेजी स्कूल चल ही नहीं पाए,कि उसके पहले ही वर्ष 2016-17 में जिले में पांच नए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल और खोल दिए। जिनमें शामावि सोंईकलां, शामावि चंद्रपुरा,शामावि आबादी पंजाबी, शामावि प्रेमसर और शामावि बालक बड़ौदा शामिल है।


न अंग्रेजी के शिक्षक पहुंचे,न बच्चों का कराया दाखिला
शासन के आदेश पर शिक्षा विभाग ने श्योपुर ब्लॉक के दस सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई करवाने वाले स्कूल तो खोल दिए। लेकिन इन अंग्रेजी माध्यम वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए न तो अंग्रेजी माध्यम वाले शिक्षकों की पदस्थी की गई और न ही पढऩे वाले बच्चों का प्रवेश दिलाया गया। ऐसे में यह स्कूल चलने से पहले ही दम तोड़ गए। वर्तमान में किसी भी मिडिल स्कूल में अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल संचालित नहीं है।


इसलिए खोले गए थे इंग्लिश मीडियम स्कूल
शिक्षा विभाग के लोगों की माने तो इन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को खोलने के पीछे शासन की यह मंशा थी कि गरीब बच्चे भी इंग्लिश मीडियम जैसे स्कूलों की तरह पढ़ाईकर सके और फर्राटे से अंग्रेजी बोल सके। मगर श्योपुर जिले में शासन की यह मंशी जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण पूरी नहीं हो पाई।


इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसे कोई स्कूल खोले गए होगे,तो उनकी जानकारी लेकर कार्रवाई करेगे।
बसंत कुर्रे,कलक्टर,श्योपुर

इसलिए भी नहीं चल पाए अंग्रेजी स्कूल
-पढ़ाने के लिए अंग्रेजी माध्यम वाले शिक्षकों की पदस्थी नहीं की गई।
-प्रायमरी की जगह मिडिल स्कूलों में खोले गए थे अंग्रेजी स्कूल ।
-अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक पदस्थ नहीं हुए तो बच्चों ने भी प्रवेश नहीं लिया।
-जहां खुले,वहां के स्कूल प्रभारियों ने भी नहीं दिखाई रुचि ।
-विभागीय अफसरों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं दिखाई रुचि ।