
सीता-राम विवाह कथा सुन भाव-विभोर हुए लोग
बड़ौदा
ग्राम कुहांजापुर में महिला मंडल द्वारा हनुमान मंदिर पर आयोजित रामकथा के दौरान राम-सीता विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। कथा समाप्त होने के बाद कथा वाचक ने आरती कराई और प्रसाद का वितरण किया गया।
कथा वाचक आचार्य महेश तेहरिया ने श्री राम-सीता के विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा किया कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी देश के राजा और महाराजाओं को निमंत्रण पत्र भेजा। एक-एक कर लोगों ने धनुष उठाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। गुरु की आज्ञा से श्री राम ने धनुष उठा प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवता फूलों की वर्षा करने लगे।
भागवत कथा में गोवर्धन पूजा का बताया महत्व
गोवर्धन का अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गौ संवर्धन से ही हो सकता है। यह उद्गार झारबाग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर चल रही श्रीमदभागवत कथा में बुधवार को कथावाचक रामलखन शास्त्री ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा, कर्म तो हमें करना ही होगा।
Published on:
20 Jan 2021 09:54 pm
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