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तिल तिल मर रही सीप, सरंक्षण करने वाले हुए मौन

कोटा में नगर निगम पर चंबल की हत्या का प्रकरण जैसी कार्रवाई की तरह श्योपुर में भी उठी जवाबदेही तय करने की मांग

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तिल तिल मर रही सीप, सरंक्षण करने वाले हुए मौन

श्योपुर। कभी शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली सीप नदी अब न केवल तिल तिल मर रही है बल्कि अपने अस्तित्व को लेकर भी संघर्ष करती नजर आ रही है। शहर की सीमा में अतिक्रमण और गंदे नालों के प्रदूषण से सीप नदी नाले में तब्दील होती नजर आ रही है। बावजूद इसके न तो जिम्मेदार आगे आ रहे हैं और न ही पर्यावरण संरक्षण का दंभ भरने वाले संगठन। तिल तिल मरती सीप नदी की जवाबदेही तय करने की बहस फिर से इसलिए भी छिड़ गई है, क्योंकि चंद दिनों पूर्व ही राजस्थान के कोटा में राज्य प्रदूषण बोर्ड द्वारा नगर निगम पर चंबल की हत्या का केस दर्ज कराया और अब लोग कह रहे हैं कि श्योपुर में भी ऐसी कठोर कार्रवाई क्यों न नहीं हो सकती? ताकि मर रही सीप के आरोपियों पर कार्रवाई हो।


शहर में लगभग चार किलोमीटर दायरे में बहती सीप नदी बंजारा डैम के चलते दो हिस्सों में बंटी हुई है। स्थिति यह है कि बंजारा डैम की अप स्ट्रीम में तो सीप नदी की दशा थोड़ी ठीक-ठाक है, लेकिन बंजारा डैम की डाउन स्ट्रीम अब नदी कम नाला ज्यादा नजर आती है। शहर के लगभग डेढ़ दर्जन बड़े नालों का गंदा पानी और पॉलीथिन का कचरा निरंतर बंजारा डैम सीप नदी की डाउन स्ट्रीम में पहुंच रहा है, लेकिन इस ओर किसी ने सुध नहीं ली है। बंजारा डैम के ठीक नीचे से दो बड़े नाले तो निरंतर शहर का पानी सीप सलिला में डाल रहे हैं, जिसके चलते नदी के पानी में से दुर्गंध आती है। यही वजह है शहर के निकट सीप नदी में बंजारा डैम की डाउन स्ट्रीम तो पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। बंजारा डैम की पुलिया से लेकर सलापुरा स्थित सीप एक्वाडेक्ट तक सीप नदी का पानी पीने योग्य तो दूर नहाने योग्य भी नहीं बचा है। जिसके चलते नदी का दम घुटता हुआ सा महसूस होता है। रही सही कसर अतिक्रमणकारियों ने कर दी, जो नदी के किनारे तो क्या बीच नदी में आकर अवैध खेती कर रहे हैं। वहीं सीप के बीहड़ में हुई अवैध प्लॉटिंग से भी नदी की सूरत बिगड़ गई है। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहा है।


नपा का सीवर ट्रीटमेंट प्लान भी अधर में
शहर की सीप नदी की दशा सुधारने नगरपालिका प्रशासन ने गत वर्ष एक सीवर ट्रीटमेंट प्लान बनाया था, लेकिन अभी तक नपा प्रशासन अभी तक उसकी डीपीआर भी नहीं बनवा पाया है। यही वजह है कि नपा का सीवर ट्रीटमेंट प्लान अधर में नजर आ रहा है। हालांकि सीवर ट्रीटमेंट प्लान धरातल पर उतरेगा तो शहर के नालों का पानी जहां सीप में नहीं गिरेगा, जिससे सीप दूषित नहीं होगी। विशेष बात यह है लगभग चार साल पूर्व भी नपाप्रशासन ने एक निर्मल सीप अभियान भी शुरू किया था, लेकिन वो भी ठंडे बस्ते में चला गया।


एक सैकड़ा गांवों की जीवनदायिनी है सीप
कराहल क्षेत्र के ग्राम पनवाड़ा के तालाब से निकलते हुई सीप नदी श्योपुर शहर के तीन ओर से निकलकर रामेश्वर धाम स्थित चंबल नदी में मिल जाती है। यूं तो सीप नदी के किनारे एक सैकड़ा से अधिक गांव आते हैं, लेकिन यह नदी श्योपुर शहर की जीवनदायिनी नदी कही जाती है। लगभग 100 किलोमीटर लंबी सीप नदी के संरक्षण के लिए कई गैर शासकीय संगठन भी सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं, लेकिन ठोस पहल कोई नहीं करता।

सीप नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लान बनाया जा रहा है। डीपीआर बनाने के लिए मैंने कल ही संबंधित एजेंसी को पत्र लिखा है, एक-दो दिन में वे आकर डीपीआर हमें देंगे, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
ताराचंद धूलिया, सीएमओ, नगरपालिका श्योपुर