
श्योपुर में चंबल ने तोड़ा 26 साल का रिकॉर्ड, खतरे के निशान से 4 मीटर ऊपर रही
श्योपुर,
श्योपुर जिले में चंबल और पार्वती नदियां अपने रौद्र रूप में पहुंच गई। जिसके चलते दोनों नदी किनारे के 39 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। विशेष बात यह है कि चंबल नदी ने तो अपने जलस्तर का 26 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। जिसके चलते खतरे के निशान के 4 फीट ऊपर पहुंच गई। वहीं पार्वती तो खतरे के निशान के 10 मीटर ऊपर बही। हालांकि अब 25 अगस्त को नदियों का जलस्तर कम होने लगा, लेकिन 23 और 24 अगस्त को दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर रही।
चंबल में 1996 से इस बार 2 फीट ज्यादा पानी
कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के साथ ही पार्वती, कालीसिंध जैसी नदियों के पानी के आवक के चलते इस बार जिले में चंबल नदी के जलस्तर ने 1996 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस बार चंबल में 1996 से 2 फीट ज्यादा पानी है। बताया गया है कि 23 अगस्त 1996 को चंबल नदी का जलस्तर 202.86 मीटर पानी था, जबकि इस बार 24 अगस्त 2022 को ये 203.46 पर पहुंच गया है। 24 अगस्त कोको चंबल खतरे के निशान से 3.96 मीटर ऊपर से बही। वहीं दूसरी ओर पार्वती नदी भी अपने उच्चतमत जलस्तर पर रही। 24 अगस्त को ही पार्वती का उच्चतम जलस्तर 207.90 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 9.90 मीटर ऊपर थी।
इन 39 गांवों में बाढ़ का असर
चंबल और पार्वती नदियों किनारे के जिन 39 गांवों में बाढ़ का प्रभाव दिख रहा है, उनमें जलालपुरा, झोंपड़ी, अडवाड़, सूंडी, छीताखेड़ली, माखनाखेड़ली, दलारना, इचनाखेड़ली, लहचौड़ा, बनवाड़ा, साडा का पाड़ा, सामरसा, ऊंचाखेड़ा, दांतरदा, बिचपुरी, तलावदा, जैनी, रामेश्वर, जवासा, सिरसौद, टोंगनी, बगदरी, खिरखिरी, बिलोनी, छोलघटा, खैरघटा, कीरपुरा, लीलोली, दिमरछा, सांड, दांतेटी, नितनवास, साथेर, चुंगीपुरा, बरौली, चक गोहटा, चक धोरेरा, गोवर्धा और नदीगांव शामिल है।
Published on:
25 Aug 2022 03:16 pm
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