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शरीफ खान ने राम की लीला को बनाया आजीविका, 32 साल से कर रहे रोलप्ले

-रामलीला में विभिन्न पात्रों को अपनी कलाकारी से जीवंत कर रहे ग्वालियर के मंच कलाकार शरीफ खान-श्योपुर की रामलीला में भाग लेने 27 साल से लगातार आ रहे शरीफ

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शरीफ खान ने राम की लीला को बनाया आजीविका, 32 साल से कर रहे रोलप्ले

शरीफ खान ने राम की लीला को बनाया आजीविका, 32 साल से कर रहे रोलप्ले

श्योपुर,
आज के दौर में जहां सांप्रदायिकता के नाम पर लोग धर्मों के बीच फासले बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं ऐसी ही सांप्रदायिक वर्जनाओं को तोड़ते हुए एक मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म के आराध्य भगवान राम की लीलाओं को ही अपनी आजीविका का स्रोत बना लिया। ये युवक हैं शरीफ खान, जो पिछले 32 सालों से रामलीलाओं में एक पेशेवर एक्टर के रूप में काम करतेे हुए अपनी आजीविका चला रहे हैं।


मूलत: मुरैना जिले के ग्राम सुजरमा में जन्म शरीफ खान वर्तमान में ग्वालियर रहता हैं और इन दिनों श्योपुर की 73वीं रामलीला में विभिन्न भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं। अपने पिता से पुश्तैनी काम के रूप में मिले शरीफ को इस काम में काफी अच्छा लगता है, यही वजह है कि उन्होंने रामलीला को ही अपना व्यवसाय बना लिया। जिसके चलते उन्हें पूरे साल श्योपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों के साथ ही देश के अन्य इलाकों में कहीं न कहीं रामलीलाओं में अभिनय करने को बुकिंग मिलती रहती है। महज 15 की उम्र से अपने पिता के साथ रामलीलाओं में विभिन्न पात्रों का रोल प्ले करते करते शरीफ खान अब किसी भी पात्र के रोल में ढल जाते हैं।


महिला प्रधान भूमिका ज्यादा
47 वर्षीय शरीफ खान यूं तो रामलीला के किसी भी कैरेक्टर का रोल प्ले कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर वे महिला प्रधान भूमिका में ही नजर आते हैं। उन्हें रामचरित मानस की न केवल पूरी जानकारी है बल्कि एक हजार से अधिक चौपाईयां और 500 से अधिक दोहे तो उन्हें कंठस्थ भी हो गए हैं। यही नहीं किसी भी भूमिका के मंचन के लिए जब मंच पर उतरते हैं तो पहले भगवान का नाम भी लेेते हैं।


कोई भेद नहीं है, सभी धर्म समान-शरीफ
शरीफ खान के मुताबिक पिछले 32 साल से तो वे स्वयं रामलीलाओं का मंचन कर रहे हैं और ये काम उन्हें उनके पिता जुगनू खान से मिलेे। उनके पिता जुगनू ने भी कई वर्षों तक रामलीलाओं में भूमिकाएं निभाई। धर्मों को लेकर शरीफ खान कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों ने कभी धार्मिक भेदभाव नहीं सिखाया। मजहब भगवान ने नहीं बनाए बल्कि हम लोगों ने ही तय किए हैं, ऊपर से केवल मानव आता है और हमने उसे धर्म-जाति में बांट दिया। राम-रहीम सब एक हैं और मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।