
#आओ मनाएं मिट्टी के दीयों से दिवाली#श्योपुर आज भी मिट्टी के दीयों का क्रेज बरकरार
श्योपुर,
दीपों का पर्व कहा जाने वाला त्यौहार दीपावली भले ही आधुनिक विद्युतीकृत लाइटिंग की चकाचौंध से सराबोर होता हो, लेकिन आस्था के साथ बना मिट्टी के दीयों का एक अलग महत्व है। आज भी दिवाली बिना मिट्टी के दीयों और मिट्टी के कलश के बिना अधूरी रहती है।
यही वजह है कि श्योपुर में आज भी दीपावली पर मिट्टी के दीयों का ही क्रेज बरकरार है। इसी के चलते शहर में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़क किनारे मिट्टी के दीयोंं व मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गई हैं। हालांकि इस बार अक्टूबर के पहले हफ्ते तक चली बारिश के कारण श्योपुर में मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने का काम देरी से शुरू हुआ, लेकिन कारीगर इस कार्य में तेजी से जुटे हैं, साथ ही बाहर से भी डिजायनर दीये मंगवाकर विक्रय कर रहे हैं।
शहर के गुलंबर चौक गांधीपार्क के साथ ही पुराना बसस्टैंड, पटेल चौक, सात नीमड़ी, सलापुरा नहर, पुल दरवाजा आदि क्षेत्रों में सड़क किनारे दुकानें सजाकर बैठे मिट्टी के दीये व बर्तन विक्रेताओं पर खरीदारों की आवक भी हो रही है। मिट्टी के दीये विक्रेताओं का कहना है कि इस बार बारिश देर तक होने के कारण निर्माण देरी से शुरू हुआ है,फिर भी स्टॉक है और बाहर से भी डिजायनर दीये मंगाए गए हैं। इस बार 10 रुपए के 10 दीये की दर से विक्रय चल रहा है, जबकि मिट्टी का कलश 20 से 30 रुपए में बिक रहा है। शहर के कुम्हार मोहल्ला में रहने वाले कारीगर रामअवतार प्रजापति का कहना है कि शासन द्वारा मिट्टी के लिए तो स्थान तय कर दिया है, लेकिन मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए लकड़ी की दिक्कत हैं। बाजार में लकड़ी महंगी मिलती है।
सड़क किनारे का किराया 2 रुपए प्रतिदिन, सीएमओ बोले-अब ये भी नहीं लेंगे
शहर में सड़क किनारे दिहाड़ी और फेरी वालों के बैठने के एवज में नगरपालिका द्वारा 2 रुपए प्रति दिन की बाजार वसूली की जाती है। इन्हीं में मिट्टी के दीये और मिट्टी के बर्तन विक्रेता भी शामिल हैं। हालांकि 2 रुपए प्रतिदिन की इस बाजार वसूली से इन दीये विक्रेताओं को एतराज भी नहीं है, लेकिन नपा सीएमओ ताराचंद धूलिया का कहना है कि अब दीपावली तक इन लोगों से ये राशि भी वसूल नहीं की जाएगी। इसके लिए मैं आज ही आदेश जारी करता हूं।
Published on:
22 Oct 2019 12:17 pm
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