
ईंट भट्टों की चिमनियों का धुआं बिगाड़ रहा आवोहवा
श्योपुर,
भले ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए तमाम कवायदें किए जाने के दावे किए जाएं, लेकिन धरातलीय स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही नजर आती है। इसी का उदाहरण है कि र्इंट भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं, जो शहर सहित आसपास के गांवों की आवोहवा बिगाड़ रहे हैं। बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आज तक जांच नहीं की है। यही वजह है कि शहर से सटे इलाकों में ईंट भट्टों के धुएं में नियमों की धज्जियां उड़ रही है।
श्योपुर जिला मुख्यालय के आसपास दो दर्जन भी से अधिक संख्या में ईंट भट्टे चल रहे हैं। इनमें शहर के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में ही रायपुरा, जाटखेड़ा, सलापुरा, जैदा, हसनपुर हवेली, इच्छापुरा, नागदा, बगवाज, सेमल्दा आदि इलाकों में नियम कायदों को धता बताते हुए ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। इन भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं शहर के आसमान पर छा जाता है, जिससे शहर की आवोहवा प्रदूषित हो रही है। बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कार्यवाही तो दूर आज तक कभी जांच भी नहीं की गई है। जिसके चलते इन ईंटभट्टों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है। इसके साथ ही कई जगह अवैध खनन भी हो रहा है।
100 एक्यूआई के ऊपर प्रदूषण लेवल
वर्तमान में शहर सहित आसपास के इलाकों में प्रदूषण स्तर 100 एक्यूआई(एयर क्वालिटी इंडेक्स) से भी ज्यादा है। जो स्वास्थ्य के लिए अनहेल्दी बताया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि 100 एक्यूआई के नीचे का प्रदूषण लेवल सामान्य रहता है, लेकिन 100 के ऊपर ये स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल हो जाता है।
रायपूरा गांव के आसपास 12 चिमनियां
जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे 552-एक्सटेंशन पर स्थित ग्राम रायपुरा के आसपास तो 12 ईंट भट्टों की चिमनियां बेरोकटोक धुआं उगल रही है। गांव की आबादी के समीप ही लगे इन भट्टों से निकलने वाला धुआं भी अब लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। हालांकि ग्रामीण पूर्व में भी इस संबंध में शिकायत कर चुके हैँ और फिर एक बार ईंटभट्टों के प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग उठाई है।
ये है ईंटभट्टों के लिए नियम
-आबादी क्षेत्र से बाहर होना चाहिए।
-पर्यावरण लाइसेंस और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी जरूरी।
-मिट्टी खनन के लिए खनिज विभाग की अनुमति जरूरी।
-हाइवे, नदी, जलाशय, सार्वजनिक भवन आदि से दूर होने चाहिए।
-ईंट भट्टा संचालन के लिए जिला पंचायत से भी अनुमति जरूरी।
Published on:
26 Feb 2020 07:00 am
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