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प्रसादी में जलेबी खाने से हुए उल्टी-दस्त, 50 से ज्यादा लोग बीमार

ग्वाड़ी गांव में 50 से 60 बीमारों का गांव में इलाज, 28 अस्पताल में भर्ती

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श्योपुर. शहर से सटी ग्राम पंचायत मठेपुरा के गांव ग्वाड़ी में अचानक उल्टी-दस्त का प्रकोप बढ़ने से 50 से ज्यादा लोगों की हालत बिगड़ गई। यहां तक कि 20 से अधिक लोगों को हालत ज्यादा खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें बच्चे, पुरुष महिलाएं शामिल हैं।

जानकारी लगने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्वाड़ी पहुंची। यहां उल्टी-दस्त से पीड़ितों का उपचार करने के साथ दवाएं दी। साथ ही टीम ने पानी के स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर व क्लोरीन का घोल डाला। इसके साथ ही पीएचइ विभाग ने कुएं के पानी का सैंपल लिया। जिला अस्पताल से एक बच्ची को रैफर किया गया है।

PHE के टेस्ट में पानी की रिपोर्ट ओके
जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए मरीजों के परिजनों ने बताया कि कुएं का पानी पीने के बाद यह स्थिति बनी। हालांकि पीएचइ द्वारा लिए गए कुएं के पानी के सैंपल की रिपोर्ट ओके बताई गई है। 385 आबादी वाले ग्वाड़ी गांव में बीती रात से उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू हुआ। सुबह सात बजे सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम में दो चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर मरीजों का सर्वे किया। करीब 28 पीड़ितों को गांव में ही उपचार दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में आया सामने
ग्रामीण कुएं का पानी पीकर बीमार होने की बात कह रहे हैं, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्वाड़ी पहुंची तो ग्रामीणों से पूछताछ में सामने आया कि दोउड़ी किसी मन्नत पर देवता पर चढ़ाने वाला प्रसाद में जलेबी चढ़ाने के बाद प्रसादी में उसे ग्रामीणों ने खाया था। जिससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग बीमारी फैलने के कारण जानने में लगा हुआ है।

इनको कराया अस्पताल में भर्ती
उल्टी-दस्त से पीड़ित सीमा, रामकथा, अनारबाई, गुलाबबाई, मिलन, धन्नालाल, रामरूप,पवन, जगदीश, रोहित, केड़ा, ग्रन्था, राकेश, दिलराज शामिल हैं। वहीं देविका, दीपू, गुंजन, विजय, अजय, कुशाल, गोला, फोरंतिया बच्चे शामिल हैं। इनके अलावा अन्य लोग भी अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। सीएमएचओ, श्योपुर डॉ. बीएल यादव ने बताया किउल्टी-दस्त की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य टीम को गांव भेजा। घर-घर सर्वे कराया। पीएचइ के टेस्ट में पानी ठीक निकला है। प्रसादी में जलेबी खाने की बात भी सामने आई है। फिर भी हम बीमारी का कारण पता कर रहे हैं।