
1.5 से 4.5 किलो रह जाएगा स्कूल बैग का वजन, जांच के लिए बनाई स्पेशल कमेटी
श्योपुर. बढ़ते बस्तों के बोझ से नौनिहालों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के चलते अब स्कूलों में बस्तों का बोझ कम करने की कवायद चल रही है। ऐसे में यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो बच्चे कम वजन वाले बस्ते स्कूल ले जा सकेंगे। इसके लिए सरकार के निर्देश के बाद जिला शिक्षा शिक्षा केंद्र ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है, जो निजी स्कूलों की जांच करेगी और शासन के तय मापदंडों के अनुसार बस्तों का वजन निर्धारित करेगी।
शिक्षा के व्यवसायीकरण के चलते निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की मोटी-मोटी किताबें नियम विरुद्ध चलाई जा रही हैं। जिसके कारण ज्यादातर स्कूलों के बच्चों के बस्ते का वजन 8 से 10 किलो तक पहुंच जाता है, इससे बच्चों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि स्कूली शिक्षा विभाग ने बच्चों के कंधे का बोझ कम करने के लिए कक्षावार स्कूल बैग का वजन तय कर दिया है। इस संबंध में 29 अगस्त को आदेश जारी किया था। जिसके बाद अब जिले मेें भी इस आदेश का पालन कराने के लिए विभागीय अफसर एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि जिला शिक्षा केंद्र श्योपुर के जिला परियोजना समन्वयक ने भी 20 सितंबर को एक आदेश जारी किया है, जिसमें निजी स्कूलों की जांच के लिए कमेटी बना दी है। जिसमें संबंधित विकासखंड के खंडस्रोत समन्वयक और आरटीई नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है। ये टीम निजी स्कूलों में जाकर बच्चों के बस्तों की जांच करेगी और शासन की गाइडलाइन का पालन कराएगी।
5वीं-8वीं की परीक्षा को लेकर असमंजस
पिछले सत्र में 5वीं और 8वीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर हुई थी, लेकिन तत्समय ये आदेश निजी स्कूलों लागू नहीं था। इस बार शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों में भी ये व्यवस्था अपनाने की बात कही है। हालांकि अभी आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन शहर के कई निजी स्कूलों में इन दोनों कक्षाओं में एमपी बोर्ड की निर्धारित किताबें पूरी नहीं चलाई जा रही और निजी प्रकाशकों किताबें चलाई जा रही हैं। जिसके चलते बच्चे असमंजस में हैं।
निर्धारित के अतिरिक्त नहीं होंगी पुस्तकें
शासन के निर्देशानुसार जिला शिक्षा केंद्र श्योपुर द्वारा जारी किए गए आदेश में जहां जांच कमेटी बनाई गई है, वहीं कुछ दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा निर्धारित या एनसीइआरटी द्वारा नियत पुस्तकों के अतिरिक्त पुस्तकें विद्यार्थी के बस्ते में नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक स्कूल को नोटिस बोर्ड एवं कक्षा कक्ष में बस्ते के वजन का चार्ट प्रदर्शित करना होगा। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन बेग विहीन दिवस रहेगा।
इसके साथ ही आदेश में कुल 8 बिंदु की गाइडलाइन जारी की गई है।
जांच के लिए जिला शिक्षा केंद्र ने जारी किए आदेश
जिले में 169 निजी स्कूल संचालित
जिले में वर्तमान में कुल 169 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें श्योपुर विकासखंड में 118 निजी स्कूल हैं, जबकि विजयपुर में 28 और कराहल विकासखंड में 23 निजी स्कूल संचालित हो रहते हैं। हालांकि शासन द्वारा हर कक्षा के लिए निर्धारित किताबें नियत हैं, लेकिन निजी स्कूल अपनी कमाई के चलते अतिरिक्त किताबें चलाते हैं। जिसके चलते निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे शासन द्वारा तय किए गए वजन से चार गुना तक वजन ढो रहे हैं।
पहली व दूसरी कक्षा के बच्चे 5 किलो तक का बस्ता ढो रहे हैं जबकि इससे ऊपर की कक्षाओं के बच्चों के कंधों पर कॉपी किताबों का भार 10 किलो से भी ज्यादा है।
शासन से यूं निर्धारित है बस्तों का वजन
कक्षा वजन (किलो में)
1 व 2 -----------------1.6 से 2.2
3,4 व 5--------------- 1.7 से 2.5
6 व 7 -----------------2.0 से 3.0
8 ----------------------2.5 से 4.0
9 व 10----------------- 2.5 से 4.5
11 व 12------------ विषय के हिसाब से
शासन के निर्देशानुसार स्कूलों में बस्तों का वजन की गाइडलाइन का पालन कराने के लिए हमने जांच टीमें बना दी है। साथ ही दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। शासन की गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा।
-पीएस गोयल, डीपीसी, जिला शिक्षा केंद्र श्योपुर
Published on:
22 Sept 2022 03:08 pm
बड़ी खबरें
View Allश्योपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
