
प्रसन्न रहने से होता है बुद्धि का विकास: संत असंग साहेब
बड़ौदा
राष्ट्रीय संत असंग साहेब के प्रवचन से पहले बड़ौदा के लक्ष्मीनाथ मंदिर से एक जुलूस निकला जो कथा स्थल तक पहुंचा। यहां संत असंग साहेब ने कहा कि प्रसन्न रहने से बुद्धि का विकास होता है। ज्यादा सोने व ज्यादा गुस्सा करने से बुद्धि घट जाती है। रोज ठहाका मारकर हंसना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम भगवान की दरबार में भी एक मंत्रा थी जो नहीं सुधरी। तनाव से दूर रहना चाहिए। तनाव से सुंदरता घट जाती है थोड़ा व्यायाम भी रोज करना चाहिए पति पत्नी को टेंशन मुक्त होकर दोस्त की तरह रहना चाहिए चिंता छोडकऱ संतो के संग रहने से बुद्धि का विकास होता है कभी निंदा नहीं करनी चाहिए माता पिता के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।
संत ने कहा कि जो बिना अर्थ के बिना जरूरत के अपना घर छोडकऱ फालतू नहीं जाता है। विदुर जी कहते है उसके घर में सुख का निवास रहता है। बिना जरूरत के घूमने कहीं मत जाओ। उन्होंने कहा कि महिलाओं का तब तक विवाह नहीं होता तब तक तुम्हारा मायका तुम्हारा घर है और विवाह हो गया तब तुम्हारा घर तुम्हारा ससुराल है बार-बार ससुराल को छोडकऱ माई के चक्कर मत काटना नहीं तो घर तबाह हो जाएगा। असंग देव जी के प्रवचन सुनने बड़ौदा के अलावा अन्य गांव से महिला पुरुष सैकड़ों की संख्या में पहुंचे।
भगवान शिव को बाहरी इंद्रियों के द्वारा नहीं समझा जा सकता: अभेदानंद
- शिव कथा में पार्वती की तपस्या पर डाला प्रकाश
पुलिस थाना मैदान के पीछे रविवार से शिव कथा प्रारंभ हुई। कथावाचक स्वामी अभेदानंद ने पार्वती की तपस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां शक्ति भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तप करती हैं। लेकिन हमारे ग्रंथ बताते हैं कि शिव तत्व सनातन है जो अविनाशी है उसे बाहरी तत्व से भक्ति पूजा-पाठ से नहीं पाया जा सकता उसे तो एक संत की शरण में जाकर प्राप्त कर सकते हैं। भगवान शिव को हम बाहरी इंद्रियों के द्वारा नहीं समझ सकते भगवान शिव को जानने के लिए हमें अंतर घट में शिव तत्व को सद्गुरु के माध्यम से जानना होगा।
उन्होंने कहा कि पार्वती कि कठोर तपस्या को देख ऋषि-मुनि भी दंग रह गए। अंत में भगवान भोले का आसन हिला। उन्होंने पार्वती की परीक्षा के लिए पहले सप्तर्षियों को भेजा और पीछे स्वयं वटुवेश धारण कर पार्वती की परीक्षा के निमित्त प्रस्थान किया। जब शिवने सब प्रकार से जाँच-परखकर देख लिया कि पार्वती कि उनमें अविचल निष्ठा हैं, तब तो वे अपने को अधिक देर तक न छिपा सके। वे तुरंत अपने असली रूप में पार्वती के सामने प्रकट हो गए और उन्हें पाणिग्रहण का वरदान देकर अंतर्धान हो गए।
Published on:
09 Dec 2019 11:47 am
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