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कांगड़ा: एयरपोर्ट विस्तार के साथ मिलेगा बेहतर पुनर्वास। जानिए

खुशखबर: पहले बने मास्टर प्लान फिर उसके अनुरूप हो कार्य धर्मशाला/ शिमला. हिमाचल प्रदेश में अभी तीन हवाई अड्डे हैं। इसमें कांगड़ा हवाई अड्डा सबसे महत्वपूर्ण हैं। यहां साप्ताहिक 70 फ्लाइटें आती हैं। इसकी महता को देखते हुए विस्तारीकरण किया जा रहा है। कांगड़ा जिला के गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण से प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास के लिए कारगर कदम उठाए जाएंगे।

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कांगड़ा: एयरपोर्ट विस्तार के साथ मिलेगा बेहतर पुनर्वास। जानिए

कांगड़ा: एयरपोर्ट विस्तार के साथ मिलेगा बेहतर पुनर्वास। जानिए

प्रभावित परिवारों का व्यवस्थित हो पुनर्वास
उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कांगड़ा तथा एसडीएम शाहपुर को जमीन का संयुक्त रूप से निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रभावित परिवारों का व्यवस्थित तरीके से पुनर्वास हो सके। डॉ. जिंदल की अध्यक्षता में इस बाबत शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय परिसर के सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों के 22 के करीब भवन तथा अन्य आधारभूत ढांचे जिसमें सड़कें, पेयजल पाइप लाइन, विद्युत ट्रांसफार्मर भी विस्तारीकरण क्षेत्र में आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन आधारभूत ढांचों को आवश्यकतानुसार नई जगह पर तैयार करने के लिए वैकल्पिक प्लान तैयार करें।
सभी आवश्यक सुविधाएं एक जगह
प्रभावित परिवारों के पुनवार्सित करने की जगह पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। विस्तारीकरण की जद में आने वाले स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, पशु औषधालयों तथा पंचायत घरों की रिपोर्ट तैयार की गई है। प्रभावितों के पुनर्वास के लिए भूमि निरीक्षण के बाद सभी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हिमुडा को डिटेल मैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन 14 गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण में आठ पंचायतों के 14 राजस्व गांवों की भूमि अधिग्रहित करना प्रस्तावित है इसमें राजस्व गांव रच्छियालु, जुगेहड़, भड़ोल, कयोडिय़ा, बाग, बल्ला, बरसवालकड़, भेड़ी, ढुगियारी खास, गगल खास, झिकली इच्छी, मुगरहाद, सहौड़ा, सनौरा शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण को लेकर भवनों, फलदार पौधों, पेड़ों तथा फसलों का मूल्यांकन कार्य अंतिम चरण में है इसमें आउटसोर्स एजेंसी के साथ साथ राजस्व, उद्यान, वन तथा कृषि विभाग के कर्मचारी शामिल रहे हैं। लोगों के सामाजिक हित किसी स्तर पर प्रभावित नहीं हों इसके लिए सामाजिक सर्वेक्षण करवाया गया है।