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चांदपाठा झील में बोटिंग बंद, निराश होकर लौट रहे सैलानी

भदैया कुंड पर भी खत्म नहीं हुई वीरानी, बर्बाद हो रहा पर्यटन स्थल

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चांदपाठा झील में बोटिंग बंद, निराश होकर लौट रहे सैलानी

चांदपाठा झील में बोटिंग बंद, निराश होकर लौट रहे सैलानी

शिवपुरी. रोजगार के नाम पर कोई उद्योग धंधा शिवपुरी जिले में नहीं है तथा कोई इंडस्ट्री अभी तक इसलिए नहीं लग पाई क्योंकि यहां पर माधव नेशनल पार्क है। इन हालातों के बीच शिवपुरी में पर्यटन उद्योग ही एकमात्र उपाय है, क्योंकि शिवपुरी में प्राचीन पर्यटन स्थलों की भरमार है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता व प्रशासन की उदासीनता के चलते न केवल यह पर्यटन स्थल बदहाल हो रहे हैं, बल्कि कुछ तो अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। शिवपुरी में आने वाले सैलानी जब इन स्थलों पर जाते हैं, तो वहां उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है। स्थानीय प्रशासन भी यहां टूरिज्म को बढ़ाने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रहा, तथा जनप्रतिनिधियों ने भी शिवपुरी को सिर्फ अपने भाषणों में ही पर्यटन नगरी बनाने के दावे किए, लेकिन धरातल पर किसी ने कोई काम नहीं किया।
भदैया कुंड भी बचा रहा अपना अस्तित्व
शिवपुरी का सबसे प्राचीन पर्यटन स्थल व प्राकृतिक झरना भदैया कुंड है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी यहां आया करते थे। अभी भी बाहर से आने वाले सैलानी यहां पर जाकर जब चौतरफा गंदगी देखते हैं, तो वे निराश हो जाते हैं। यहां का कैफेट एरिया अभी तक शुरू नहीं हो सका, जिसके चलते यह पर्यटन स्थल अपनी पहचान भी खोता जा रहा है। इस पर्यटन स्थल पर अधिकार को लेकर माधव नेशनल पार्क व प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के चलते यह स्थल भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया।

सूख जाएगी चांदपाठा झील, कैसे मिलेगा वन्यजीवों को पानी
माधव नेशनल पार्क में स्थित चांदपाठा झील में जिस तरह से जलकुंभी छाई हुई है, तथा इस वर्ष बारिश भी कम हुई है, जिसके चलते इस बार गर्मियों से पहले ही झील का पानी सूख जाएगा। फिर वन्यजीवों के लिए पानी का विकराल संकट भी उत्पन्न हो सकता है। टूरिस्ट विलेज के मैनेजर ने बताया कि जलकुंभी का पौधा पानी बहुत तेजी से सोखता है तथा उससे ही वो हरा-भरा रहता है। उन्होंने बताया कि मंैने एक गिलास में जलकुंभी का पौधा रखा, तो सुबह से शाम तक में गिलास का पानी पूरी तरह से सूख गया।
जनप्रतिनिधि व प्रशासन को कोस रहे सैलानी
शिवपुरी की चांदपाठा झील में कभी सैलानी बोङ्क्षटग करते थे और टूरिज्म विभाग की ओर से इसमें राजकुमारी नाम की बड़ी बोट के अलावा डीजल इंजन बोट भी चलाई जाती थीं। पिछले एक साल से यह बोङ्क्षटग पूरी तरह से बंद हो गई, क्योंकि जलकुंभी ने पूरे पानी पर कब्जा कर लिया। झील में बोङ्क्षटग करने के लिए आने वाले सैलानियों को न केवल निराश होकर लौटना पड़ता है, बल्कि जब वो जलकुंभी के बीच फंसी हुई बोट देखते हैं तो शिवपुरी के जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को कोसते हुए जाते हैं।

होती है बहुत तकलीफ
&हमारी बोङ्क्षटग तो एक साल से ही बंद है। पहले तो जलकुंभी को हटाकर किसी तरह से बोट चला लेते थे, लेकिन अब वो भी नहीं कर पा रहे। भदैया कुंड पर भी पानी सड़ांध मार रहा है, चौतरफा गंदगी देखकर हमें भी बहुत तकलीफ होती है। इन्हें संरक्षित करने की जरूरत है।
नवीन शर्मा, मैनेजर टूरिस्ट विलेज व टूरिज्म विभाग