
एआईएसएचई पोर्टल पर दर्ज करवाना होगा नाम
शिवपुरी। टपकती छत और बिना लैब के विज्ञान संकाए की छात्राएं अपना कॅरियर बनाने के लिए कड़े संघर्ष कर रही थीं। लेकिन अब जल्द ही शिवपुरी के इस एक मात्र गल्र्स कॉलेज का नया लुक सामने आने वाला है।
दरअसल शहर के प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी गल्र्स कॉलेज (लाल कॉलेज) में बीते 25 वर्ष से विज्ञान संकाय तो छात्राएं पढ़ रही हैं, लेकिन उनके प्रैक्टिकल करने के लिए कॉलेज में लैब अब तक नहीं है। बरसात में कॉलेज बिल्डिंग की छत टपकने तथा जगह-जगह लटकते बिजली के तारों से छात्राओं के जीवन को भी खतरा बना हुआ था। तीन साल पूर्व भेजे गए प्रस्ताव पर विश्व बैंक ने 3.50 करोड़ रुपए की राशि उच्च शिक्षा विभाग भोपाल को भेजी, ताकि कॉलेज को सुरक्षित व बेहतर बनाया जाए। अब उसमें न केवल नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई, बल्कि चारों लैब, सेमिनार हॉल के साथ ही पुरानी कॉलेज बिल्डिंग का भी जीर्णोद्धार शुरू हो गया। शिवपुरी का एकमात्र गल्र्स कॉलेज अब एक नए लुक में नजर आएगा।
मांगे गए थे प्रस्ताव
गल्र्स कॉलेज के प्राचार्य एनके जैन ने बताया कि विश्व बैंक योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने उन कॉलेजों से प्रस्ताव मांगे थे, जहां जगह कम है तथा अध्ययन में असुविधा हो रही हो। प्रस्ताव स्वीकृत कर वल्र्ड बैंक ने साढ़े 3 करोड़ की राशि स्वीकृत की है, जिसमें कॉलेज के पीछे ही नई बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसका काम लगभग पूरा होने के साथ ही फाइनल स्टेज पर चल रहा है। वहीं नई कॉलेज बिल्डिंग को पुरानी बिल्डिंग से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि छात्राएं दोनों बिल्डिंग में आसानी आ-जा सकें। इसके अलावा पूरी तरह जर्जर व खंडहर हो चुकी पुरानी कॉलेज बिल्डिंग का जीर्णोद्धार कार्य भी शुरू किया जा चुका है, जिसमें नई छत डालने के साथ ही अंदर बाहर-प्लास्टर, नई रैलिंग, नई बिजली की फिटिंग व सभी जगह कोटा टाइल्स लगाई जा रही है।
मंत्री ने कहा था, नहीं बदले कॉलेज का स्वरूप
कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि शिवपुरी विधायक व कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा था कि कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग का बिना स्वरूप बदले हुए, उसका जीर्णोद्धार कराया जाए। इसलिए कॉलेज बिल्डिंग के कंगूरों से लेकर दीवारों के अंदर-बाहर प्लास्टर, नई छत, कोटा टाइल्स के अलावा नए सिरे से लाइट फिटिंग की जा रही है।
गल्र्स कॉलेज में था लाल होटल
शिवपुरी गल्र्स कॉलेज जिस बिल्डिंग में संचालित है, वो सिंधिया स्टेट के समय में लाल होटल हुआ करता था। चूंकि पुराना रेलवे स्टेशन भी यहीं पर था और कस्टम गेट भी पास ही मौजूद है। यही वजह है कि बाहर से आने वाले लोग रेलवे स्टेशन से उतरकर होटल में पहुंच जाया करते थे। यही वजह है कि इस कॉलेज का नाम लाल कॉलेज से ही पहचाना जाता है।
ये होगा नई बिल्डिंग में
गल्र्स कॉलेज की नई बिल्डिंग में 300 छात्राओं के बैठने की क्षमता वाला सेमिनार हॉल तथा उसमें एक स्टेज भी बनाई गई है। इसके अलावा फिजिक्स, केमेस्ट्री, जूलॉजी एवं बॉटनी की लैब भी बनकर तैयार हो गईं। इसमें कम्प्यूटर लैब के साथ ही लाइब्रेरी भी बनाई गई है। इसके अलावा नई बिल्डिंग में चार क्लास रूम भी बनाए गए हैं।
अब नहीं रहेगी समस्या
कॉलेज की नई बिल्डिंग में चारों लैब, सेमिनार हॉल, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब व चार कमरे बनाने के साथ ही उसे पुरानी बिल्डिंग से जोड़ा है। पुरानी बिल्डिंग का उसी स्वरूप में जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिससे अब कोई समस्या कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में नहीं रहेगी।
एनके जैन, प्राचार्य गल्र्स कॉलेज
Published on:
06 Oct 2022 11:12 am
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