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कागजों में सुधर रहा कुपोषण

अकेले बदरवास विकासखंड में ही 3 हजार बच्चे हैं दर्ज फिर भी एनआरसी केन्द्र पड़े हैं खाली  

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बदरवास.शिवपुरी । कुपोषण दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है और वह विभिन्न योजनाओं के जरिए कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने हर साल लाखों रुपए का भारी भरकम बजट भी खर्च कर रही है। यही नहीं कुपोषित बच्चों को गांव-गांव से ढूंढक़र पोषण पुनर्वास केंद्र पर पहुंचाने के लिए विभिन्न स्टाफ तैनात कर रखा है जिनके वेतन पर भी हर साल बड़ी राशि खर्च की जा रही है। इसके बाद भी कुपोषण में ज्यादा कमी नहीं आ पा रही है। इसका उदाहरण है शिवपुरी जिले का बदरवास विकासखंड। यहां इन दिनों पोषण पुनर्वास केंद्र सूने पड़े हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में एक भी बच्चा यहां भर्ती नहीं है, जबकि विभाग के आंकड़ों में तीन हजार बच्चे कुपोषित दर्ज हंै। यहां गौर करने वाली बात है कि जिन दो प्रमुख विभाग स्वास्थ्य व महिला बाल विकास पर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी है वे अपनी ड्यूटी एक दूसरे को पत्र लिखकर निभा रहे हैं। जबकि रिजल्ट में पोषण पुनर्वास केंद्र खाली पड़े हैं। दो विभागों द्वारा किए जा रहे पत्र व्यवहार और पोषण पुनर्वास केंद्र हकीकत से स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर जिम्मेदार अधिकारी कुपोषण को लेकर कितने गंभीर हैं। स्टाफ के मुताबिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदरवास में बना पोषण पुनर्वास केंद्र बीते तीन माह से खाली है यानि कि यहां कोई भी कुपोषित बच्चा भर्ती नहीं हुआ है।
जानकारी के मुताबिक बदरवास विकासखंड में करीब 38 हजार सहरिया तथा इतनी ही आबादी जाटव समुदाय की है। इनके परिवारों में कुपोषित बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। इन बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने की पहली जिम्मेदारी महिला बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की है। लेकिन इन विभागों के अधिकारी एक दूसरे को पत्र व्यवहार कर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रहे हैं।

हां पत्र लिखा है
हां मैंने महिला बाल विकास विभाग को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि क्षेत्र में जो कुपोषित बच्चे हैं उन्हें चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएं ताकि उन्हें स्वस्थ्य किया जा सके।
डॉ आरआर माथुर, बीएमओ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदरवास
मैंने सुपरवाइजरों, आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं व स्वास्थ विभाग को पत्र लिखा है। जिसमें विभाग की एएनएम द्वारा चिह्नित कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने को कहा गया है। ताकि यहां भर्ती होने वाले बच्चों के कुपोषण को दूर कर उनके स्वास्थ्य को सुधारा जा सके।
फ्रांसिका कुजूर, प्रभारी अधिकारी