
शिवपुरी. आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका विकसित करने के लिए राशि जारी की गई, बजट खत्म भी हो गया, लेकिन वे पौधे कहीं नजर नहीं आ रहे। जबकि वहां महिलाओं के शरीर में प्रोटीन व विटामिन की कमियों को दूर करने वाले सोंजने की फली वाले पौधे सहित अन्य पेड़ लगाए जाने थे। सूत्रों की मानें तो यह राशि सुपरवाइजरों ने कार्यकर्ताओं को डरा-धमकाकर बैंक से निकलवाकर बंदरबांट कर लिया। यह तो महज उदाहरण है, जबकि कई कार्यक्रमों व अभियान के लिए शासन से आने वाली राशि को ठिकाने लगा कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
नाम न छपने की शर्त पर महिला बालविकास के कर्मचारियों एवं आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि विभाग के अधिकारियों द्वारा जो रुपए डकारने होते हैं, वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बैंक खाते में पहुंचा दी जाती है, जिसे कुछ महीनों बाद कार्यकर्ताओं पर सुपर वाइजर व वरिष्ठ अधिकारी, नौकरी से निकालने जैसी धमकी देकर स्वयं की जेब गर्म कर ली जाती है। यही कारण है कि शहर की किसी भी सरकारी भवन में संचालित किसी भी आगनबाड़ी पर पौधरोपण नहीं हो सका है। उस राशि को सुपर वाइजर द्वारा अपने पास जमा कर लाखों रुपए की चपत शासन को लगाई जा चुकी है। इतना ही नहीं कुपोषित बच्चों के घरों पर पौधारोपण करने बीजों के लिए आए 200 रुपए भी इन सुपरवाईजर द्वारा निकाल लिए गए।
स्नेह शिविर व डे-केयर के भी लिए आती है राशि
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कुपोषण से सुपोषण अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए 12 दिन का स्नेह शिविर लगाया जाता है। जिसमें समूह द्वारा भोजन दिया जाता है और आंगनबाड़ी से बच्चों को थर्ड और फोर्थ मील दिया जाता है। 12 दिनों तक स्नेह शिविर के लिए आगनबाड़ी कार्यकर्ता को पूरे दिनों तक भोजन की व्यवस्था जिसमें हलुवा, पोहा, उपमा, केले सहित अन्य पोष्टिक चीजें तैयार कर खिलाया जाता है। इसके लिए कार्यकर्ता के खाते में 8 हजार की राशि दी जाती है, जिसमें से सहयोगिनी के लिए 3 हजार की राशि शामिल होती है। इस 8 हजार की राशि में से भी एक तिहाई राशि आगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा शेष राशि सुपरवाइजर द्वारा मांग ली जाती है। वही आंगनबाड़ी पर चलने वाले डे केयर की राशि भी प्रतिमाह होने वाली मीटिंग में ले ली जाती हैं।
कुछ दिन पहले ही सामने आया मामला
महिला एवं बालविकास विभाग द्वारा ऐसा ही मामला ग्रामीण क्षेत्र की आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सामने आ चुका है। जिसमें कोर्ट रोड पर स्थित सेंट्रल बैंक पर आंगनबाड़ी सुपर वाइजर द्वारा कार्यकर्ताओं को बुलाकर किसी फर्म को एक साथ रुपए दिए जा रहे थे। जैसे यह बात खबरनवीसों तक पहुंची तो मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
लालिमा अभियान भी केंद्रों से नदारद
शहर की सरकारी बिल्डिंगों में संचालित होने वाली समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर किशोरियों के लिए नारे लिखने व बेनर बनाने के लिए सरकार द्वारा 500 रुपए की राशि कार्यकर्ताओं के खाते में डाली गई थी। उस राशि को भी विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं से निकलवाकर अपनी जेब गर्म कर लीं। ऐसे में कभी जांच हुई तो कार्यकर्ता और सहायिका की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
&आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका लगाई जानी थी। अभी हमने पोहरी में फोरेस्ट डिपार्टमेंट से बात की है और वहां पर शुरू कर रहे हैं। अभी उसकी राशि केंद्रों को आवंटित नहीं की। स्नेह शिविर की राशि तदर्थ समिति के खाते में डाली जाती है, लेकिन यह शिविर वहां लगाए जाते हैं, जिन केंद्रों के अंतर्गत 10 या उससे अधिक बच्चे कुपोषित होते हैं।
ओपी पांडेय, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग
Published on:
07 Feb 2018 10:37 pm
बड़ी खबरें
View Allशिवपुरी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
