
सीने में दर्द से तड़पता रहा मरीज, अस्पताल में नहीं मिला स्टाफ, हो गई मौत
शिवपुरी/अमोला. जिले का एकमात्र करैरा अस्पताल ऐसा है, जहां 8 माह में 7वें बीएमओ का आदेश आ गया। राजनीति का अखाड़ा बने करैरा अस्पताल में अब मरीज बिना इलाज के दम तोडऩे लगे हैं। रविवार की सुबह सिल्लारपुर के एक ग्रामीण की इलाज न मिलने से मौत हो गई तथा ड्यूटी डॉक्टर ने बीएमओ के नाम लिखी चि_ी में स्पष्ट उल्लेख किया है कि स्टाफ अनुपस्थित था और मरीज के परिजन स्टाफ तलाशते रहे। मौत के बाद परिजन आक्रोश में थे, जिससे झगड़े की आशंका भी बनी रही। महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉक्टर की यह चि_ी किसके पास जाएगी?, क्योंकि आयुक्त ने पिछोर बीएमओ को अतिरिक्त प्रभार दिया है, जबकि शासन ने सातवें नए बीएमओ को भेजने का आदेश जारी कर दिया।
परिजनों ने जोड़े-हाथ पैर, ड्यूटी डॉक्टर करते रहे ब्रश
अमोला के पास स्थित ग्राम सिल्लारपुर में रहने वाले शिवदयाल (40) पुत्र गेबूराम जाटव को रविवार की सुबह सीने में दर्द उठने की वजह से उनकी पत्नी का भाई सीताराम व भाई करैरा अस्पताल लेकर पहुंचे। सीताराम ने बताया कि हम सुबह 8.50 बजे अस्पताल पहुंच गए तथा हमारे जीजा दर्द से तड़प रहे थे। परिजनों ने पूरे अस्पताल को खंगाला, लेकिन वहां कोई स्टाफ नहीं मिला। इसी बीच एक युवक ने बताया कि नीचे वाले कमरे में डॉक्टर होंगे। बकौल सीताराम, जब हम नीचे कमरे में पहुंचे तो वहां मिले डॉक्टर ने कहा कि मैं अभी ब्रश करके तैयार होकर आऊंगा। इस दौरान शिवदयाल के सालों ने डॉक्टर के हाथ-पैर तक जोड़े, लेकिन 20 मिनिट बाद जब डॉक्टर देखने पहुंचे, तब तक शिवदयाल की मौत हो चुकी थी। डॉक्टर ने मृत घोषित करके शव को घर ले जाने की सलाह दे दी।
फिर डॉक्टर ने लिखा बीएमओ के नाम शिकायती आवेदन
ड्यूटी डॉक्टर नरेंद्र मांझी ने इस घटना से संबंधित बीएमओ करैरा के नाम एक शिकायती आवेदन लिखा। जिसमें उल्लेख किया है कि 4 सितंबर को सुबह 8.50 बजे सिल्लारपुर के शिवदयाल को सीने में दर्द होने पर परिजन लेकर अस्पताल आए थे। मरीज के परिजन सुबह 9.30 बजे तक अस्पताल में स्टाफ को ढूंढते रहे, लेकिन सुबह 10 बजे तक कोई भी स्टाफ नहीं आया था। नर्सिंग स्टाफ, वार्डवॉय व ड्रेसर कोई भी नहीं था। सुबह 10 बजे ड्रेसर नंदराम को बुलाया गया तो वो बोला कि मैं सिर्फ एक्सीडेंट केस में आता हूं। इलाज न मिलने की वजह से मरीज की मृत्यु हो गई। अस्पताल में स्टाफ न होने से मरीज के परिजन आक्रोश में थे, जिससे लड़ाई की आशंका बनी रही। इसलिए अनुपस्थित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कारीगरी करता था मृतक
मृतक शिवदयाल के दो बेटे व एक बेटी हैं। वो कारीगरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। परिजनों के मुताबिक उसे बीपी की कोई समस्या नहीं थी तथा सिर्फ सीने में दर्द उठा तो उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां कोई देखने वाला ही नहीं था और उन्होंने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
पूर्व बीएमओ ने ली कार्रवाई की गारंटी
करैरा अस्पताल के छटवें बीएमओ रहे डॉ. देवेंद्र खरे ने करैरा हैल्थ नाम के वाट््सअप ग्रुप पर डॉ. नरेंद्र मांझी द्वारा लिखे गए मैसेज के जवाब में लिखा है कि स्टाफ में संविदा वालों की सेवा समाप्त होगी तथा रेग्यूलर वाले निलंबित होंगे, इन दोनों की जिम्मेदारी मेरी है।
मामले से अनजान सीएमएचओ
अभी करैरा के वित्तीय अधिकार पिछोर बीएमओ पर हैं। बिना इलाज के मौत की कोई जानकारी मुझे नहीं है और न ही यह पता कि ड्यूटी डॉक्टर ने कोई शिकायती आवेदन भी दिया है। मैं पता करवाता हूं कि क्या मामला है।
डॉ. पवन जैन, सीएमएचओ शिवपुरी
Published on:
05 Sept 2022 11:54 pm

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