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धाय महादेव मंदिर पर गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र, आचार्य पीठ व बनेगी पर्यावरण यूनिवर्सटी

धाय महादेव मंदिर पर गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र, आचार्य पीठ व बनेगी पर्यावरण यूनिवर्सटीप्राचीन मंदिर परिसर का पीठाधीश्वर व संतो की टीम ने किया भ्रमणप्रोजेक्ट में दो करोड से अधिक खर्च होगी राशि

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धाय महादेव मंदिर पर गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र, आचार्य पीठ व बनेगी पर्यावरण यूनिवर्सटी

धाय महादेव मंदिर पर गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र, आचार्य पीठ व बनेगी पर्यावरण यूनिवर्सटी


धाय महादेव मंदिर पर गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र, आचार्य पीठ व बनेगी पर्यावरण यूनिवर्सटी
प्राचीन मंदिर परिसर का पीठाधीश्वर व संतो की टीम ने किया भ्रमण
प्रोजेक्ट में दो करोड से अधिक खर्च होगी राशि
पिछोर। शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग स्थित खोड कस्बे के प्राचीन व सिद्ध स्थल धाय महादेव मंदिर पर बीते रोज उत्तराखंड़ ऋषिकेश से श्रीपंच दशनाम आवाहन अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधूत बाबा अरूण गिरी ने अपने संतो की टीम के साथ मंदिर परिसर का भ्रमण किया और आगामी समय में यहां पर एक गुरूकुल, आध्यात्म केन्द्र के साथ आचार्य पीठ और पर्यावरण यूनिवर्सटी खोलने की बात कही। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब दो करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे।
संतों की टीम में प्रमुख तौर पर उनके शिष्य ब्रह्मश्री स्वामी डॉ एसके नारायणन फाउंडर चेयरमैन सनातन धर्म फाउंडेशन आंध्र प्रदेश, अखाड़े के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत शिवेश गिरी आदि भी मौजूद रहे। पीठाधीश्वर के साथ अल्प प्रवास पर आए संतों की टीम ने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर धार्मिक स्थल का हर स्तर पर बारीकी से निरीक्षण किया। इस क्रम में उन्होंने पत्रिका को बताया कि अगर आसपास के ग्रामीण धार्मिकजनों और संबंधित लोगों का सहयोग के साथ सहमति मिलती है तो इस धाय महादेव के विकास हेतु प्रारंभ में लगभग 2 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। यहां सनातन संस्कारों को मजबूत करने के लिए गुरुकुल की स्थापना करने के साथ आध्यात्म केंद्र बनाया जाएगा। इसके अलावा यहां पर संतों का समागम स्थल बनाने के साथ संस्कृत महाविद्यालय और मुख्य रूप से आचार्य पीठ की स्थापना की जाएगी। फिलहाल अखाड़े द्वारा धाय महादेव मंदिर पर १०८ कुंडीय महायज्ञ जल्द कराया जाएगा।
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उज्जैन के महाकालेश्वर की तरह विकसित करेंगे धाय महादेव को
बातचीत में पीठाधीश्वर ने बताया कि अगर सबकुछ सही रहा तो वह धाय महादेव मंदिर को उज्जैन के महाकालेश्वर व नासिक के त्रंबकेश्वर आदि स्थानों की तरह विकसित करेंगे। संतो के ठहरने और बड़े धार्मिक आयोजन यज्ञ आदि हेतु विभिन्न निर्माण कार्य किए जाएंगे। यहां की पुरातत्विकता को जीवित किया जाएगा। यहां से आवाहन अखाड़े का संचालन व सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार समूचे मध्यप्रदेश सहित पूरे विश्व में किया जाएगा। इससे सभी का कल्याण होगा।