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धाय वृक्ष के नीचे से निकला था शिवलिंग, फिर हुआ था मंदिर का निर्माण

धाय वृक्ष के नीचे से निकला था शिवलिंग, फिर हुआ था मंदिर का निर्माणआज मंदिर पर भगवान के दर्शन करने देश भर से आते है लोगश्रावण माह में हर दिन होता है भगवान शिव का अभिषेक

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धाय वृक्ष के नीचे से निकला था शिवलिंग, फिर हुआ था मंदिर का निर्माण

धाय वृक्ष के नीचे से निकला था शिवलिंग, फिर हुआ था मंदिर का निर्माण


धाय वृक्ष के नीचे से निकला था शिवलिंग, फिर हुआ था मंदिर का निर्माण
आज मंदिर पर भगवान के दर्शन करने देश भर से आते है लोग
श्रावण माह में हर दिन होता है भगवान शिव का अभिषेक
खोड। जिले के पिछोर अनुविभाग के खोड कस्बे में करीब दो सौ साल पूर्व घनघोर जंगल में जब एक बाबा तप कर रहे थे, उसी समय एक भविष्यवाणी हुई कि धाय पेड़ के नीचे शिवलिंग है। यह सुनकर जब बाबा ने पेड़ के नीचे खोदा तो वहां पर एक शिवलिंग निकला। उसके बाद उसी जगह पर मंदिर का निर्माण हुआ। समय के साथ मंदिर ने विशाल रूप ले लिया। अब यह मंदिर धाय महादेव के नाम से देश भर में जाना जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक पुरानी मान्यता यह भी है जब मंदिर निर्माण के बाद भंडारा चल रहा था। उसी समय अचानक से कढ़ाई में घी कम पड़ गया। चूंकि बाजार काफी दूर था और आसानी से आना-जाना सुलभ नही था। जब यह बात मंदिर के महंत को पता चली तो उन्होने भोलेनाथ से प्रार्थना की और अपने सेवक से कहा कि पास में जो नदी है, उसमें से जल भरकर कढ़ाई में डाल दो। जैसे ही कढ़ाई में वह जल डाला गया तो वह देखते ही देखते घी में बदल गया। बाद में हजारों लोगों ने उस भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर में अखंड ज्योति कई सालों से अनवरत जल रही है। अब श्रावण माह में यहां पर वैश्य समाज के साथ अन्य लोग भगवान शिव का निरंतर अभिषेक करते है। महाशिवरात्रि व मकर संक्रांति पर यहां विशाल मेला लगता है। मंदिर में भगवान के दर्शन करने से हर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। देश भर के लोग यहां पर भगवान के दर्शन करने आते है।
बॉक्स-
मंदिर प्रांगण में है नौ देवियां
मंदिर प्रांगण में एक जगह नौ देवियों के अलग अलग लगभग नौ-नौ फीट की दूरी पर भव्य मंदिर शोभायमान हो रहे हैं। यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। पास ही राम लला माता सीता का दरबार के साथ हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है। लोग बताते है कि इस मंदिर ेके होने से इस पूरे क्षेत्र में कोई बड़ी विपदा नही आई।