
बोर्ड परीक्षा में सख्ती का परिणाम पर नहीं पड़ा असर, हाईस्कूल में 78.15 तो इंटर में 80.47 फीसदी छात्रों ने मारी बाजी
सिद्धार्थनगर. हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा के दौरान सत्ता बदलने पर परीक्षा के दौरान बरती गई सख्ती का असर परीक्षा परिणाम पर नहीं दिखा। रविवार को घोषित परिणाम में हाईस्कूल में बढोतरी दर्ज की गई जबकि इंटर के परीक्षा परिमणाम में महज डेढ़ फीसदी की ही गिरावट दर्ज की गई। परीक्षा के दौरान नकल रोकने आदि को लेकर शासन प्रशासन की ओर से की गई सख्ती का खास असर परीक्षा परिणाम पर नहीं रहा। जबकि परीक्षा के दौरान सत्ता बदलने के बाद की गई सख्ती को लेकर यह अंदेशा जताया जा रहा था कि इस बार हाईस्कूल व इण्टर का परीक्षा परिणाम पूर्व में भाजपा शासनकाल जैसा ही होगा।
जबकि परीक्षा परिणाम में कोई खास अन्तर नहीं है। हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम वर्ष 2016 में 80 फीसदी रहा वर्ष 2017 में दो फीसदी बढ़कर 82.82 फीसदी पहुंच गया। लेकिन इस वर्ष दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस बार परीक्षा परिणाम 78.15 रहा। हाईस्कूल की परीक्षा के लिए 32180 परीक्षार्थी पंजीकृत थे जिसमें सख्ती के चलते 13751 परीक्षार्थी ही शामिल हुए। इसमें 10747 परीक्षार्थियों ने परीक्षा पास की।
इसी तरह से इण्टर के परीक्षा परिणाम पर असर तो पड़ा लेकिन उसका खास असर नहीं माना जा रहा है। इंटर का परीक्षा परिणाम बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष बेहतर रहा। तीन फीसदी की बढोत्तरी हुई। इण्टर का परीक्षा परिणाम वर्ष 2016 में 79 फीसदी रहा जबकि 2017 में 77.81 फीसदी रहा। इस बार का परीक्षा परिणाम 80.47 फीसदी है। इससे स्पष्ट है कि परीक्षा के दौरान सख्ती का कुछ खास असर देखने को नहीं मिला। जबकि परीक्षा के दौरान ही जब नई प्रदेश सरकार का गठन हुआ मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ से शासन की कमान संभाली तो परीक्षा के दौरान नकल माफियाओं पर सख्ती करने का फरमान जारी किया।
प्रशासन सख्त तो हुआ लेकिन परीक्षा केन्द्रों पर सख्ती का खास असर नहीं दिखा था। सभी को अंदेशा था कि सख्ती का असर परीक्षा परिणाम पर पडे़गा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बीते वर्ष भी आधी बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद भाजपा सरकार सत्ता में आते ही सख्ती बरती थी लेकिन फिर भी परीक्षा परिणाम पर इसका खास असर नहीं पड़ा था। इस बार भी पूरी तैयारी के साथ सख्ती किए जाने के बाद भी परीक्षा परिणाम पर खास असर नहीं पड़ा। शिक्षा के जानकारों की माने तो भाजपा सरकार के सत्ता में आने को लेकर परीक्षार्थी पढ़ाई के प्रति काफी गंभीर हो गए थे।
जानकारों की माने तो इससे पहले जब भी प्रदेश में भाजपा की सरकार रहीं है यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इण्टर परीक्षा का परिणाम 28 से 30 फीसदी ही रहा है। वर्ष 2000 में तो भाजपा शासन काल में मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने नकल अध्यादेश लागू किया था। जिसमें कई शिक्षक नकल कराने के जुर्म में जेल भी भेजे गए थे। बाक्स परीक्षा परिणाम हाईस्कूल पंजीकृत 32180 परीक्षा में शामिल 13751 पास 10747 /प्रतिशत 78.15 इण्टर परीक्षा परिणाम पंजीकृत 23009 परीक्षा में शामिल 20475 पास 16477/ प्रतिशत 80.47
Published on:
29 Apr 2018, 3:52 PM IST
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