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नक्सलाइट हमले मे सीएएफ जवान शहीद

नक्सलाइट हमले मे सीएएफ जवान शहीद, घात लगाकर छिपे नक्सलाइटों ने हमला कर की हत्या, देर शांम घर पहुंचा शहीद का शव, पुत्र ने दी मुखाग्रि

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घात लगाकर छिपे नक्सलाइटों ने हमला कर की हत्या

सीधी। छत्तीसगढ़ आम्र्ड फोर्स मे पदस्थ प्रधान आरक्षक को नक्सलाइटों के द्वारा हमला कर हत्या कर दी गई। जिसका पार्थिव शरीर रविवार को उनके गृह ग्राम लाया गया, जहां जवान के पुत्र के द्वारा सोननदी के गउघाट में मुखाग्रि दी गई। शहीद जवान की पिता व दादा भी एसएसएफ में पदस्थ थे। पिता भी ड्युटी के दौरान शहीद हो गए थे, जिस पर उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ती मिली थी।
बताया गया कि सीधी शहर के विष्णु नगर निवासी देवेंद्र सिंह पिता जयबीर सिंह ३५ वर्ष छत्तीसगढ़ आम्र्ड फोर्स की २२वीं बटालियन बी कंपनी मे कार्यरत थे। जिनकी ड्युटी दंतेवाड़ा पथरगुड़ा जगदलपुर के ओरछा क्षेत्र मे सड़क निर्माण कार्य मे सुरक्षा को लेकर लगाई गई थी। शनिवार को कंपनी के पांच सदस्यों के द्वारा सर्चिंग की जा रही थी। इस बीच घात लगाकर झाड़ी मे छिपे नक्सलाइटों के द्वारा हमला कर दिया गया। जिससे देवेंद्र सिंह के साथ एक अन्य जवान की मौत हो गई, जबकि तीन जवान घायल हो गए। शहीद का शव रविवार को सीधी लाया गया, जहां उनके पुत्र के द्वारा मुखाग्रि दी गई।।
पिता व दादा भी थे सैनिक-
शहीद देवेंद्र सिंह के पिता व दादा भी सैनिक रह चुके हैं। बताया गया कि शहीद के पिता जयवीर सिंह व दादा हरिनारायण सिंह भी एसएएफ मे प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। पिता जयवीर सिंह भी नक्सली हमले में वर्ष २००४ मे शहीद हो गए थे, जिससे उसके पुत्र देवेंद्र सिंह को वर्ष २००५ मे छत्तीगढ़ आम्र्ड फोर्स मे संविदा नियुक्ती मिली थी। पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए पुत्र भी देश की सेवा करते हुए शहीद हो गया।
दो पुत्र हो गए अनाथ-
शहीद देवेंद्र सिंह के दो पुत्र हैं, जिनमें बड़ा पुत्र राज सिंह 12 वर्ष व छोटा पुत्र सिद्धार्थ सिंह ८ वर्ष का है। शहीद की शादी २१ जून २००७ में पूजा सिंह नामक युवती से हुई थी, जो शादी के १३ वर्ष बाद विधवा हो गई।
शहीद के दाह संस्कार मे नहीं पहुंचा प्रशासनिक अमला-
देश की सेवा करते हुए शहीद का शव आने की सूचना पूरे प्रशासनिक अमले को थी, किंतु शहीद के अंतिम संस्कार कार्यक्रम मे कलेक्टर से लेकर पुलिस अधीक्षक व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा जाना उचित नहीं समझा गया। छत्तीसगढ़ आम्र्ड फोर्स से आए पुलिस के जवानों के द्वारा सलामी देकर दाह संस्कार मे मदद किए।
दो माह पूर्व परिवार से हुई थी मुलाकात-
शहीद देवेंद्र सिंह की अपने बीबी बच्वों व परिजनों से मुलाकात दो माह पूर्व हुई थी। इसके बाद वे जिंदा घर नहीं आ सके बल्कि उनका शव घर आया। विगत १७ जनवरी को छोटे भाई योगेंद्र सिंह के पुत्र के मुडंन संस्कार मे शामिल होने ड्युटी से वापस घर आए थे, २३ जनवरी को फिर वापस ड्युटी मे चले गए, इसके बाद वह अपने परिवारजनों से मुलाकात नहीं कर पाए।