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सीएम हेल्पलाइन में भेजी जा रही फर्जी जानकारी

चार माह से नहीं दिया जा रहा जीवन निर्वाह भत्ता

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Suresh Kumar Mishra

May 12, 2016

sidhi news

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सीधी
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भर्रेशाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नित एक से बढ़कर एक चौकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। डीईओ द्वारा सीएम हेल्पलाईन शिकायत समाधान मे भी मनमानी बरतते हुए झूठी जानकारी देकर शिकायते बंद कराई जा रही है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश मे आया है जहां लिपिक को विगत करीब एक वर्ष से निलंबित किया गया है। जिसका प्रकरण उच्च न्यायालय मे विचाराधीन है। इधर विगत चार माह से निलंबित लिपिक जीवन निर्वाह भत्ता भी बंद कर दिया गया है। जिससे निलंबित लिपिक के द्वारा सीएम हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज कराई गई। जिसकी फर्जी जानकारी दर्ज करा शिकायत निराकृत कर दी गई।

जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा सीएम हेल्प लाइन मे जानकारी दी गई कि कार्यालय के निलंबित लिपिक इंद्रमणि तिवारी को बहाल कर दिया गया था। किंतु जिस विद्यालय मे पदस्थापना की गई वे वहां उपस्थिति नहीं हुए। वहीं ऐसी स्थिति मे जीवन निर्वाह भत्ता देने का प्रावधान नहीं है। जबकि आलम यह है कि निलंबन के बाद ही लिपिक इंद्रमणि तिवारी के द्वारा उच्च न्यायालय में अपील की गई है। उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन होने पर कोई भी सक्षम अधिकारी बहाली नहीं दे सकता। जिससे बहाली का प्रश्र ही नहीं उठता। वहीं यह भी सवाल उठता है कि जब निलंबित कर्मचारी अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता नहीं है तो जीवन निर्वाह भत्ता किसे दिया जाता है।

भाजपा अध्यक्ष ने की कलेक्टर से शिकायत
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भर्रेशाही सहित अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष लालचंद्र गुप्ता के द्वारा बुधवार को कलेक्टर से मुलाकात की गई। जहां उनके द्वारा लिपिको का एम शिक्षा मित्र के बहाने वेेतन भुगतान पर रोक लगाने सहित डीईओ की अन्य गतिविधियों का उजागर किया गया। जिस पर कलेक्टर के द्वारा कहा गया कि डीईओ की गतिविधियों का पानी सिर से ऊपर हो गया है। मैं लंच से वापस आने के बाद बुलाता हूं।

चार माह से नहीं नसीब हुआ भत्ता
किसी भी निलंबित कर्मचारी को जीविको पार्जन के लिए नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता निलंबन अवधि मे दिया जाता है। बहाली के बाद रोके गए संपूर्ण वेतन का भुगतान किया जाता है। किंतु निलंबित लिपिक को विगत चार माह से जीवन निर्वाह भत्ता भी बंद कर दिया गया है। बताया गया कि निलंबन के जनवरी माह 2016 तक निर्वाह भत्ता दिया जाता था। अचानक फरवरी माह से बंद कर दिया गया है।