19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP के इस टाइगर रिजर्व में जल्द होगा इस खास पशु का आगमन, जानें विस्तार से इसके बारे में…

-भारतीय वन्य जीव संरक्षण ने MP के विंध्य इलाके को इस पशु के लिए माना है उपयुक्त स्थान-मुख्यमंत्री शिवराज सिंह दे चुके हैं मंजूरी

2 min read
Google source verification

सीधी

image

Ajay Chaturvedi

Sep 12, 2021

गौर

गौर

सीधी. जिले के संजय टाइग रिजर्व में जल्द ही एक विशेष प्रकार के पशु का आगमन होने जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मंजूरी दे दी है। वैसे भी भारतीय वन्य जीव संरक्षण ने भी एमपी के इस इलाके के टाइगर रिजर्व को इस पशु के लिए सर्वथा उपयुक्त माना है।

क्या है गौर

ये पशु गौरवंश का विशालतम जीव है। कंधे तक छह फीट की ऊंचाई वाले वयस्क नर का वजन 650 से 1000 किलो तक होता है। पूंछ को छोड़कर इसकी लंबाई करीब सवा नौ फुट होती है। मादा, नर से थोड़ी छोटी होती है। नर का रंग काला जबकि मादा करीब भूरे रंग की होती है। ये गौर की खास पहचान है। इसके चारों पैरों का खुर से लेकर घुटने तक का रंग सफेद होता है। पैरों के रंग में नर व मादा में कोई अंतर नहीं होता। नर के सिर पर मजबूत और घुमावदार सींग होती हैं जो करीब 45- 46 इंच लंबी हो सकती हैं। मादा की सींग अपेक्षाकृत पतले व नर से छोटी होती है।

गौर झुंड में रहने वाला जीव है। आमतौर पर 10-15 के झुंड का नेतृत्व युवा और शक्तिशाली नर करता है। झुंड में मादा, बच्चे और एक-दो वयस्क नर होते हैं। कई बार चरते-चरते दो या तीन झुंड एक साथ मिल जाते हैं जिससे बड़े झुंड का भ्रम पैदा होता है लेकिन हकीकत में एक झुंड आमतौर पर अपने झुंड के अन्य सदस्यों के साथ ही चरता है, फिर पूरा झुंड अलग हो जाता है।

गौर का भोजन घास ही है पर यह पेडों की छाल, बांस के पत्ते, पेड़-पौधों के गिरे पत्ते, फल-फूल भी खा लेता है। गौर घास के मैदानों, सदाबहार वनों और पतझड़ वनों में निवास करता है। ये सुबह और शाम को चरते हैं। दोपहर में यह प्रायः छायादार स्थान पर विश्राम करते पाए जाते हैं और रात में ये जंगलों की ओर विश्राम करने चले जाते हैं।

अब संजय टाइगर रिजर्व सीधी में इन्हीं 50 गौर लाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हाल ही में हुई राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षण (वन्य प्राणी) आलोक कुमार बताते हैं कि भारतीय वन्य जीव संरक्षण देहरादून ने संजय टाइगर रिजर्व को गौर की पुनर्स्थापन के लिए उपयुक्त पाया है। कुमार के अनुसार गौर पुनर्स्थापना के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने तकनीकी अनुमति भी दे दी है।

बताया जा रहा है कि संजय टाइगर के वन क्षेत्रों में गौर की मौजूदगी के ऐतिहासिक साक्ष्य मिले हैं। यहां के वन क्षेत्रों में पिछले कई दशक से गौर नहीं पाए जाते रहे। टाइगर रिजर्व सीधी में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व अथवा पेंच टाइगर रिजर्व से प्रस्तावित 50 गौर लाए जाएंगे। इसके पहले कान्हा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर लाकर पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं।