। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद के सहयोग से विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर स्थानीय नाट्य संस्था रंगदूत ने सात दिवसीय राष्ट्रीय बीरबल नाट्य समारोह का आयोजन किया है। समारोह के दूसरे दिन सोमवार की शाम कौशांबी इलाहाबाद से आए कलाकारों ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक नौटंकी शैली में सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र का मंचन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से आए प्रसिद्ध कला समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी ने समस्त कलाकारों को बधाई दी।
निर्देशक संतोष कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में आम जनमानस ने इस पारंपरिक शैली के प्रति नकारात्क दृष्टिकोण बना रखा है जबकि यह ऐसी विधा है जो दर्शकों साथ सीधा संबंध बनाती है और उनके आम दिनचर्या से सीधे जुड़ जाती है। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के रघुकुल के राजा थे। वे बहुत दानी और प्रतापी थे। उनका दान त्रिलोक में गूंजने लगता है। वे 100वें यज्ञ की तैयारी करते हैं तभी इन्द्र का सारा इंद्रासन डोल जाता है। वे विश्वामित्र को बुलाते हैं और विश्वामित्र को बुलाकर राजा हरिश्चन्द्र का सत्य धर्म नष्ट करने का हुक्म देते हैें। विश्वामित्र अयोध्या में आकर माली के बगीचे में जाकर वाराह का रूप धारण करके फुलवारी को नष्ट कर देते हैं।