
ईरान और अमेरिका में तनाव चरम पर है। (PC: AI)
Will America attack Iran: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर सबकी जुबां पर बस एक ही सवाल है कि क्या अमेरिका, ईरान पर हमला बोलेगा? अमेरिका ने पिछले साल भी ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी। हालांकि, इस बार हालात काफी अलग हैं। इस बीच, खबर है कि यूएस नेवी का एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln Carrier) मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप के इस दांव को ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, एक्स्पर्ट्स का मानना है कि यह युद्ध की ओर अमेरिका का पहला कदम भी हो सकता है।
सीएनएन की रिपोर्ट में एक्स्पर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि अगर यूएस, ईरान पर अटैक करता है तो उसकी रणनीति पिछले साल हुए हमले से अलग होगी। उसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), उससे जुड़ी बसीज सेना और ईरानी पुलिस बल से संबंधित कमांड सेंटर और दूसरे ठिकानों पर ध्यान देना होगा। लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर कमांड सेंटर आबादी वाले इलाकों में हैं, जिसका मतलब है कि अमेरिकी हमलों में उन आम नागरिकों के मारे जाने का काफी खतरा है, जिनका ट्रंप समर्थन कर रहे हैं। अगर हमले में आम नागरिक मारे जाते हैं, तो अमेरिका का दांव उल्टा भी पड़ सकता है।
पूर्व यूएस नेवी कैप्टन कार्ल शूस्टर का कहना है कि अमेरिका जो भी करे, उसे बेहद सटीक होना चाहिए और IRGC के अलावा किसी और का नुकसान नहीं होना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफ़िथ एशिया इंस्टीट्यूट के विज़िटिंग फेलो पीटर लेटन ने कहा कि अमेरिका को ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने वाले हमले पहले करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान के नेतृत्व और IRGC के पास पूरे देश में कई तरह के कमर्शियल बिज़नेस और पैसे कमाने वाले एंटरप्राइज़ हैं। ऐसे में उन खास जगहों पर हमले का बड़ा असर होगा, जो उनके और उनके परिवारों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूएस का मकसद IRGC की लीडरशिप और आम सैनिकों को शासन के बजाय अपनी जान बचाने की ज़्यादा चिंता करवाना होना चाहिए।
एनालिस्ट्स ने कहा कि पिछले साल गर्मियों में न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिकी हमले में B-2 बॉम्बर सबसे आगे थे, लेकिन इस बार दूसरे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है। IRGC हेडक्वार्टर और बेस पर हमले के लिए टोमाहॉक क्रूज मिसाइल उपयोग में लाई जा सकती हैं। टॉमहॉक मिसाइलें बेहद सटीक हैं और इन्हें ईरानी तटों से काफी दूरी पर मौजूद अमेरिकी पनडुब्बियों और जहाजों से दागा जा सकता है। इसमें अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का खतरा कम हो जाएगा। इसके अलावा, जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM) से भी हमला बोला जा सकता है। 1,000 पाउंड वजनी वॉरहेड ले जाने में सक्षम ये मिसाइल 620 मील (1,000 किलोमीटर) तक की रेंज को कवर करती है। JASSM को भी ईरानी तटों से काफी दूर से अमेरिकी वायु सेना के जेट विमानों से दागा जा सकता है। एक्स्पर्ट्स का मानना है कि इसके अलावा अमेरिका ईरान पर ड्रोन हमला भी कर सकता है। इसके पास कई अत्याधुनिक ड्रोन हैं, जो दुश्मन को बड़ा जख्म देने की क्षमता रखते हैं।
अमेरिका ने अपने अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को दक्षिणी चीन के समुद्री रास्ते से मध्य पूर्व की ओर बढ़ने के आदेश दिया है। यह दर्शाता है कि अमेरिका, ईरान पर दबाव कम करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। उधर, बढ़ते खतरे को देखते हुए ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान की खामेनेई सरकार प्रदर्शनकारियों पर नरम हो रही है। भीड़ पर गोली चलाने और फांसी देने की कार्रवाई को रोक दिया गया है। माना जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका के हमले से बचने के लिए यह कदम उठाया है। हाल ही में ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों को संदेश देते हुए कहा था कि घबराएं नहीं, मदद पहुंचने वाली है।
Updated on:
15 Jan 2026 09:58 am
Published on:
15 Jan 2026 09:53 am
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