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Bihar Politics बिहार विधान चुनाव में NDA की जीत और महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद बिहार के दोनों गठबंधनों में पाला बदलने और वफादारी बदलने की चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि बिहार में कांग्रेस के सभी छह विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली JD(U) के संपर्क में हैं, सूत्रों का कहना है कि वे पाला बदलने के लिए तैयार हैं। अगर ऐसा होता है, तो RJD के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन की एक प्रमुख पार्टी कांग्रेस बिहार विधानसभा में बिना किसी प्रतिनिधित्व के रह जाएगी। वहीं जदयू बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बन जायेगी। इधर, राज्य की सबसे बड़ी पार्टी BJP भी अपनी संख्यात्मक बढ़त को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, सूत्रों का कहना है कि NDA सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की RLM के चार में से तीन विधायक BJP नेताओं के संपर्क में हैं।
नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में, NDA ने 202 सीटें जीतीं, जिसमें BJP 89 और JD(U) 85 सीटें जीतीं। महागठबंधन की 35 सीटों में से RJD को 25 और कांग्रेस को सिर्फ छह सीटें मिलीं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के सभी विधायक जदयू के संपर्क में हैं। कांग्रेस की टिकट पर मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकि नगर), अभिषेक रंजन (चनपटिया), अबिदुर रहमान (अररिया), मो. कामरुल होदा (किशनगंज) और मनोज बिस्वान (फोर्ब्सगंज) से चुनाव जीते हैं।
JD(U) का दावा है कि कांग्रेस के सभी विधायक अपनी पार्टी के कामकाज को लेकर नाराज हैं। उनका असंतोष चरम बिंदु पर है। वे कभी भी कांग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। जदयू नेता का दावा है कि, "कांग्रेस विधायक... हमारे संपर्क में हैं। यह कुछ ही दिनों की बात है (उनके पाला बदलने की)।" पार्टी खेमे का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो JD(U) सदन में BJP की संख्या से आगे निकल जाएगी।
कांग्रेस के सीनियर नेता भी ऑफ द कैमरा इसको स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं कि सभी छह विधायक पिछले कई दिनों से पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिसमें सोमवार को पटना में उसके सदाकत आश्रम मुख्यालय में आयोजित पारंपरिक "दही चूड़ा" दावत भी शामिल है। पार्टी के "मनरेगा बचाओ" अभियान के तहत राज्य पार्टी प्रमुख राजेश राम द्वारा 8 जनवरी को बुलाई गई बैठक में दो कांग्रेस विधायकों ने भी हिस्सा नहीं लिया। एक कांग्रेस सूत्र ने कहा, "मनरेगा आंदोलन पर हुई बैठक में शामिल नहीं होने वाले दो विधायक सुरेंद्र प्रसाद और अभिषेक रंजन थे। और, फिर वे सभी 'दही चूड़ा' दावत में भी नहीं आए। रंजन पिछले कुछ हफ्तों से लगभग सभी पार्टी कार्यक्रमों से गायब रहे हैं।"
जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी बातों को "राजनीति से प्रेरित" बताकर खारिज कर दिया। पूर्व CLP नेता शकील अहमद खान इससे जुड़े सवाल पर कहते हैं कि "इन अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है। हमें यकीन है कि हमारा कोई भी विधायक कहीं नहीं जा रहा है। वे सोमवार के कार्यक्रम में इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में थे। ये अटकलें पूरी तरह से झूठी हैं। उन्होंने NDA पर कांग्रेस के मनरेगा अभियान से "ध्यान भटकाने" की कोशिश करने का आरोप लगाया। जहां कांग्रेस अपने विधायकों को एक साथ रखने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं NDA के भीतर भी तनाव सतह पर आता दिख रहा है।
RLM के तीन विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह BJP के संपर्क में बताए जा रहे हैं। चौथे विधायक कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता हैं। सूत्रों ने बताया कि RLM के भीतर असंतोष कुशवाहा के अपने बेटे दीपक को राज्य कैबिनेट में नामित करने के फैसले से उपजा है, जबकि वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हाल ही में, RLM के तीनों विधायकों ने असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए कुशवाहा द्वारा आयोजित "लिट्टी दावत" में हिस्सा नहीं लिया, इसके बजाय उन्होंने नितिन नवीन से मिलना पसंद किया, जिन्हें तब BJP का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
सूत्रों ने संकेत दिया कि RLM जल्द ही औपचारिक रूप से विभाजित हो सकती है, जिससे अप्रैल में राज्यसभा के लिए कुशवाहा के संभावित पुनर्निर्वाचन पर खतरा मंडरा सकता है। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि BJP उस स्थिति में भी उन्हें NDA खेमे में बनाए रखने का कोई रास्ता निकाल लेगी। हालांकि, मधुबनी से RLM विधायक माधव आनंद ने इस बात से इनकार किया कि पार्टी विभाजन के कगार पर है। यह सच है कि विधायक इस बात से नाराज़ हैं कि कुशवाहा जी ने अपने परिवार को बढ़ावा दिया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी टूट जाएगी। हम इन मुद्दों पर पार्टी में बात कर रहे हैं।
दिनारा से RLM विधायक आलोक कुमार सिंह ने भी "लिट्टी पार्टी" में अपनी गैरमौजूदगी को कम करके बताया। उन्होंने कहा, "सिर्फ इसलिए कि हम कुछ कामों की वजह से दावत में शामिल नहीं हो पाए, लोगों ने बंटवारे की अटकलें लगाना शुरू कर दिया है। जो भी मुद्दे हैं, उन पर मीडिया में चर्चा नहीं की जा सकती। इसे पार्टी के अंदर ही सुलझा लिया जाएगा... हमारी पार्टी एकजुट रहेगी।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री RCP सिंह के JD(U) में संभावित वापसी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। कभी नीतीश के करीबी रहे सिंह को 2022 में BJP से नज़दीकी बढ़ाने और कथित तौर पर JD(U) को तोड़ने की कोशिश करने के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया था। बाद में वह चुनाव से पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए थे। हाल ही में, सिंह को बिहार में एक कुर्मी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था, जहाँ नीतीश भी मौजूद थे। हालांकि वह मुख्यमंत्री के जाने के बाद वहाँ पहुँचे, लेकिन दोनों का एक ही कार्यक्रम में होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। JD(U) सूत्रों ने कहा कि सिंह की पार्टी में वापसी से इनकार नहीं किया जा सकता। ये सभी घटनाक्रम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बिहार की राजनीति अस्थिरता के एक नए दौर में प्रवेश कर गई है, जिससे NDA के बावजूद कुछ नए गठबंधन हो सकते हैं।
Updated on:
15 Jan 2026, 9:51 AM IST
Published on:
15 Jan 2026, 9:51 AM IST
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