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विद्वता किसी कुल, वंश या जाति की जागीर नहीं-इंद्रशरण

संत रविदास जयंती हर्षोल्लास के साथ संपन्न

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Scholarship is not the property of any clan, clan or caste - Indrashar

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सीधी। संत रविदास के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर काशी के महाराज ने उन्हें अपना गुरु बनाया। महापुरुषों का जीवन हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। संत रविदास ने यह साबित किया कि विद्वता किसी कुल, वंश या जाति की जागीर नहीं होती। मन चंगा तो कठौती में गंगा को चरितार्थ करने वाले संत शिरोमणि संत रविदास ही थे। उक्त उद्गार भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष इंद्र शरण सिंह चौहान ने नगर मंडल द्वारा आयोजित संत रविदास जयंती के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि संत रविदास का जीवन आज के परिप्रेक्ष्य परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य उपेंद्र सिंह ने कहा कि संत रविदास युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं। वहीं जिला महामंत्री डॉक्टर देवेंद्र त्रिपाठी ने संत रविदास को महान समाज सुधारक एवं समाज शिल्पी बताया। महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष सरस्वती बहेलिया ने संत रविदास के जीवन संदेशों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि जो लोग जातिवाद का विश समाज में घोल रहे हैं उन्हें संत को पढऩा चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में मंडल अध्यक्ष धर्मेश शुक्ला ने संत रविदास के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन मुनि राज विश्वकर्मा एवं आभार प्रदर्शन अनुसूचित जाति मोर्चा के महामंत्री श्याम सुंदर दास ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से जिला मीडिया प्रभारी सुरेंद्र मणि दुबे, कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र गौतम, आनंद परियानी, रन्नू साकेत, मीनाक्षी मिश्रा, तुषार द्विवेदी, सोमवती जायसवाल, रंजीत साकेत, सावित्री पनाडिया, कुसुम पनाडिया, किरण जायसवाल, रामकृष्ण साकेत सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।