
Sidhi Gopaldas dam
सीधी। कभी शहर की पहचान रहा गोपालदास बांध आज अनदेखी का शिकार है। तत्कालीन कलेक्टर सुखबीर सिंह ने इसके सौंदर्यीकरण की पहल की थी। उनके बाद कई कलेक्टर आए-गए लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।जनप्रतिनिधि भी मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे। नतीजतन गोपालदास बांध में कचरे को फेका जा रहा है। बनाए गए पक्के पनघट टूटने-उखडऩे लगे हैं। अपनी अच्छाई एवं जिले की प्राकृतिक धरोहर के रूप में गोपालदास बांध को पहचान नहीं मिल पा रही है। अनैतिक कृत्यों, हत्या एवं शराबियों के अखाड़े के रूप में गोपालदास बांध की पहचान जरूर बन रही है।
अगर गोपालदास बांध पर गांधारी बने जनप्रतिनिधियों की आंखों से पट्टी हटे तो गोपालदास बांध को थोड़ी सी व्यवस्था में रीवा के रानी तालाब की तरह जरूर सवांरा जा सकता है। करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थिति गोपालदास बांध का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्रशासन की बेरूखी के कारण अतिक्रमण की चपेट में है। वहीं गोपालदास बांध में जल संवर्धन क्षमता भी पर्याप्त है।
इस तालाब का सौंदर्यीकरण कर समुचित उपयोग किया जाए तो गोपालदास बांध शहर की एक व्यवस्थित चौपाटी के रूप में उभर सकता है। साथ ही सुबह-शाम सैर-सपाटे के रूप में भी शहरवासियों को एक व्यवस्थित स्थल मिल जाएगा। गोपालदास बांध का सौंदर्यीकरण की दृष्टि से यहां पर लाइटिंग व्यवस्था अनिवार्य मानी जा रही है। वहीं बांध के खाली किनारे पर अच्छी घास का रोपड़ करा दिया जाए तो बांध की सुंदरता को चार चांद लग जाएंगे।
अतिक्रमण की चपेट में एक-तिहाई हिस्सा
10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले गोपालदास बांध का एक तिहाई क्षेत्रफल अतिक्रमण के चपेट में है। पानी से रिक्त रहने वाले जगह में जहां कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर खेती के रूप में उपयोग किया जा रहा है वहीं कई लोगों ने अतिक्रमण कर अपना आशियाना सजा लिया है। इतना ही नहीं कई लोगों ने भूमि चिन्हित कर बाउंड्री वाल का निर्माण कर अतिक्रमण किया है। इस पर प्रशासन की निगाह नहीं पड़ रही है।
शहर की पहचान बन सकता है बांध
बुद्धिजीवियों की मानें तो सौंदर्यीकरण के बाद बांध शहर की पहचान बन सकता है। रीवा के रानी तालाब की तरह इसे भी कायाकल्प की दरकार है। सौंदर्यीकरण से यहां चौपाटी एवं सैर-सपाटे के लिए व्यवस्थित स्थान मिल सकता है। वोटिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे न सिर्फ आमजन को सुकून मिलेगा, बल्कि नगर पालिका प्रशासन की आय भी बढ़ जाएगी। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
तत्कालीन कलेक्टर ने की थी पहल
तत्कालीन कलेक्टर सुखबीर सिंह ने गोपालदास बांध के सौंदर्यीकरण को लेकर पहल की गई थी। उनकी पहल पर सिंचाई विभाग द्वारा बांध के किनारे में कुछ घाटों का भी निर्माण कराया गया था। सौंदर्यीकरण के लिए बिजली के पोल भी लगा दिए गए थे जहां व्यवस्थित लाइटिंग की जानी थी। लेकिन सुखबीर सिंह का स्थानांतरण हो जाने से बांध का सौंदर्यीकरण अतीत के गर्त में समा गया। गोपालदास बांध के सौंदर्यीकरण को लेकर कलेक्टर की सार्थक पहल को जनप्रतिनिधि हाथों हाथ लिया था। चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल के नेतृत्व में कांग्रेसियों द्वारा गोपालदास बांध का गहरीकरण भी किया गया था। लेकिन समय के साथ-साथ प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को भी गोपालदास बांध के सौंदर्यीकरण की पहल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
Published on:
28 Nov 2017 05:18 pm
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