
sidhi nagar palika me hua bhrashtachar ka mamla pahucha court
सीधी। नगर पालिका में नियम विरुद्ध नियुक्ति व पारिश्रमिक भुगतान में फर्जीवाड़े का आरोप लगते हुए पार्षद नीरज गुप्ता ने सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की है। बताया कि मामला तीन साल पुराना है। दो साल से पुलिस के पास शिकायत लंबित है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, इसी मामले का विरोध करने पर सीनियर ऑडीटर का तबादला करा दिया गया था। उन्होंने तत्कालीन सीएमओ व नगर पालिका अध्यक्ष पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि, नपाध्यक्ष ने सभी आरोप निराधार बताते हुए कहा कि नियुक्ति व भुगतान में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
ये है मामला
आरटीआई कार्यकर्ता व पार्षद नीरज गुप्ता ने पुलिस को सौंपी शिकायत में बताया कि तत्कालीन सीएमओ ने आकाश सिंह तनय संजय सिंह को 85 हजार 343 रुपए के नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान किया था। इस संबंध में उन्होंने आरटीआई के तहत कुछ दस्तावेज एकत्रित कर एसपी ऑफिस में 11 जनवरी 2016 को लिखित शिकायत की थी। आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, नगर पालिका की कर्मचारियों की सूची में आकाश सिंह का नाम दर्ज नहीं था। साथ ही यह भी बताया गया था कि 7 दिसंबर 2015 तक आकाश की नियुक्ति किसी पर नहीं की गई थी। मात्र साक्षात्कार के लिए आमंत्रण भेजा था। इसके बावजूद सीएमओ ने आकाश को नवंबर-2014 से जुलाई 2015 तक तकनीकी शाखा संबंधी कार्य कराने के नाम पर 85 हजार 343 रुपए का भुगतान किया था। जबकि, इस भुगतान के लिए पूर्व में एक बार प्रयास इसलिए विफल हो गया था, क्योंकि तत्कालीन सीनियर आडिटर ने इसके लिए प्रस्तुत नोटशीट पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद उनका स्थानांतरण करा दिया गया था। इनके स्थानांतरण के बाद नए सीनियर आडिटर से नई नोटशीट बनवाकर भुगतान करा लिया गया। इधर, शिकायतकर्ता नीरज गुप्ता की शिकायत पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली पुलिस को जांच सौंपी थी।
अभियोजन अधिकारी से अभिमत मांगा
पुलिस ने प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए जिला अभियोजन अधिकारी से अभिमत मांगा था। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने 11 अप्रैल 2016 को दिए गए अभिमत में स्पष्ट उल्लेख किया है कि मेरे अभिमत में दस्तावेजों के अवलोकन के बाद आकाश सिंह, तत्कालीन सीएमओ, नपाध्यक्ष व अन्य अधिकारी-कर्मचारी जो इस भुगतान के लिए जवाब देह हैं। सबके विरुद्ध शासकीय राशि के दुरुपयोग व कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के संबंध में धारा 409, 420, 467, 468 का प्रथम दृष्टया होना पाया जाता है। जिला अभियोजन कार्यालय से अभिमत मिलने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी ने 15 अप्रैल 2016 को एसपी को प्रतिवेदन सौंपकर उनके खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468 भारतीय दंड विधान के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की थी।
सीएम हेल्पलाइन से भी नहीं मिली मदद
पार्षद नीरज गुप्ता की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने 15 अप्रैल 2016 को पुलिस अधीक्षक को भेजे प्रतिवेदन के कई महीने बाद दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं हुआ तो नीरज गुप्ता ने 6 अगस्त 2016 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत क्रमांक 2462936 के तहत शिकायत दर्ज कराई। जिसे बिना निराकरण के बंद कर दिया गया। इसी तरह शिकायत क्रमांक 3283588 दिनांक 3 फरवरी 2017 की भी शिकायत को फोर्सली बंद कर दिया गया। जबकि आज भी दो शिकायतें क्रमांक 5714948 दिनांक 21 मार्च 2018 एवं 5722686 दिनांक 23 मार्च 2018 से एल-4 में लंबित है इस तरह से सीएम हेल्पलाइन से भी शिकायतकर्ता को हेल्प नहीं मिली।
कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ। काम के बदले पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए भुगतान किया गया है। जांच भी हो चुकी हैै। आकाश सिंह के साथ पद्मधर त्रिपाठी भी थे, जिनकी नियुक्ति मेरे कार्यकाल से पहले की गई थी। लेकिन बाद में छह महीने का वेतन न मिलने के कारण दोनों ने नौकरी छोड़ दी है।
देवेंद्र सिंह चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष, सीधी
10 से कम कर्मचारियों की भर्ती का मामला था। इसलिए इसमें आपराधिक प्रकरण नहीं बनता। हां, वूसली व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को प्रकरण सौंप दिया गया है।
सूर्यकांत शर्मा, एएसपी
पुलिस व सीएम हेल्पलाइन नंबर में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अब सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की है।
नीरज गुप्ता, शिकायतकर्ता व पार्षद
Published on:
26 Dec 2018 03:42 pm
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