
Story of 4 episodes Sidhi Darindagi sidhi gang rape Innocent Rape
सीधी। बचपन मासूम होता है, वह अच्छे बुरे का फर्क नहीं कर पाता है। शायद यही कारण है कि ये हैवानियत का शिकार बन रहे हैं। महज एक माह के भीतर ही आधा दर्जन से ज्यादा घटनाएं व्यवस्था के साथ संस्कृति पर भी सवाल खड़े करती हैं। बच्चे घर परिवार में ही सुरक्षित नहीं हैं। जिनकी उगलियां पकड़कर चलना सीखा वही हाथ उनकी आबरू तक पहुंच रहे हैं।
जनवरी में महिला डेस्क पुलिस ने आधा दर्जन प्रकरण दर्ज किए हैं। पांच में पीडि़त नाबालिग हैं। आरोपियों के खिलाफ दुष्कृत्य सहित पास्को एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। वहीं कई मामले जिले के विभिन्न थानों मे भी पंजीबद्ध किए गए हैं, जिसमें भी नाबालिग पीडि़ताओं की संख्या सबसे ज्यादा है।
जनवारी में हुई दरिंदगी की ये घटनाएं
केस 1- 7 जनवरी को अमिलिया थाना अंतर्गत चितवरिया गांव निवासी एक नाबालिग के साथ जोर जबरदस्ती चितवरिया निवासी चंद्र बहोर पटेल पिता उदयभान पटेल ने दुष्कृत्य का प्रयास किया। विरोध करने पर उसने पीडि़ता से गाली-गलौज व मारपीट की। महिला डेस्क सीधी पुलिस ने धारा 354, 323, 294, 506 व पास्को एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
केस 2- 9 जनवरी को सिटी कोतवाली अंतर्गत रामपुर निवासी धीरेश साकेत पिता शिवराज ने भमरहा निवासी नाबालिग से जोर-जबरदस्ती दुष्कृत्य किया। पीडि़ता की शिकायत पर महिला डेस्क पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 366, 376,(2) (एच) व पास्को एक्ट की धारा 5/6 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
केस 3- 10 जनवरी को चुरहट थाना अंतर्गत हनुमानगढ़ निवासी रोहित तिवारी व मोहित यादव ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर सूने कमरे में ले जाकर दरिंदगी की। आरोपियों के चंगुल से भागी पीडि़ता ने परिजनों को आपबीती बताई। जिसके बाद वे महिला डेस्क पहुंचे। पुलिस ने धारा 323, 363, 376, 34 व पास्को एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला पंजीबद्ध किया।
केस 4- 30 जनवरी को रामपुर नैकिन थाना अंतर्गत भितरी गांव निवासी राजेश यादव पिता विमल ने 15 वर्षीय नाबालिग से दरिंदगी करने का प्रयास किया। हल्ला-गुहार करने पर आरोपी भाग निकला। पीडि़ता की शिकायत पर महिला डेस्क पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 354, 323 व पास्को एक्ट की धारा 7/8 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
ये है कारण
- सोशल मीडिया व इंटरनेट पर आसानी से अश्लील सामग्री मिल जाती है। लिहाजा, बच्चे समय से पहले बड़े हो रहे हैं।
- किशोरावस्था में व्यावहारिक ज्ञान की कमी से वे मासूम बच्चियों से वारदात कर बैठते हैं।
- बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति भी इसके लिए काफी हद जिम्मेदार है।
- सामाजिक विघटन भी प्रमुख कारण है। परिवार में बच्चों को नैतिक शिक्षा व व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता है। किशोरावस्था में बच्चे जो ग्रहण करते हैं उसी आधार पर ढल जाते हैं।
ऐसे हो सकता है बचाव
- अविभावकों को भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
- पड़ोसी, रिश्तेदारों के व्यवहार पर भी नजर रखें। संदेह होने पर दूर करें।
- बच्चों को अच्छे बुरे की पहचान करने की जानकारी दें। अनजान व्यक्ति से न तो कुछ खाने को ले और न ही उनके साथ जाने दें।
- ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को अपनी आंखों के सामने रखें।
Published on:
04 Feb 2018 04:26 pm
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