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मजबूरी: सीकर में 10246 किसानो का 23 करोड बकाया

समर्थन मूल्य पर बेचा चना और सरसों, अब लगा रहे चक्कर

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  नरेगा जॉब कार्ड मेन्टेन नहीं करने पर कलक्टर ने जताई नाराजगी

नरेगा जॉब कार्ड मेन्टेन नहीं करने पर कलक्टर ने जताई नाराजगी

सीकर. कोरोना काल में प्रतिकूल मौसम में हाडतोड मेहनत से तैयार उपज को समर्थन मूल्य पर बेच चुके किसान अब भुगतान के लिए ठोकरें खा रहे हैं। हाल यह है कि जिले में 10246 किसानों को उपज बेचने के बाद भी चना व सरसों का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। नतीजन किसानों के 23 करोड रुपए से ज्यादा बकाया है। इनमे कई किसान तो ऐसे है जिन्हें सरसों व चने के भुगतान का एक रुपया भी नहीं मिला है। नतीजन अब खरीफ सीजन सामने है और इन किसानों को फिर साहूकार के चंगुल में फंसना पड़ रहा है। गौरतलब है कि राजफैड की ओर से पिछले माह से सरसों व चना की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू हुई थी। हालांकि शुरूआत में तो किसानों के खाते में भुगतान की राशि आती रही लेकिन अब किसानों के खाते में भुगतान राशि आनी बंद हो गई। ऐसे में अब किसान खरीद केंद्रों में कर्मचारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं लेकिन महज आश्वासन ही मिल रहा है।

यह है जिले की हकीकत

कार्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए जिले में सरसों के लिए 5579 किसान और चना के लिए 9016 किसानों ने पंजीयन करवाया था। खरीद के लिए सीकर, श्रीमाधोपुर, लक्ष्मणगढ केवीएसएस, फतेहपुर, दांतारामगढ पलसाना, नीमकाथाना सहित 27 खरीद केन्द्र बनाए गए हैं। इन केन्द्रों पर चना और सरसों की खरीद की गई है। जिसमें से चना के 6132 किसानों का करीब 19 करोड और सरसों का करीब तीन करोड रुपया बकाया है।

यूं पड़ रहा है असर
खरीफ की फसल में किसानों को अधिक राशि की जरूरत होती है। इस सीजन में बारानी खेतों में बुवाई होती है। जिसमें काफी रुपया खर्च होता है। इधर सहकारी समितियों का ऋण और केसीसी की लिमिट चुकाने में देरी होने पर किसान को पैनल ब्याज देना पड़ता है साथ ही समय पर नहीं चुकाने पर डिफाल्टर होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में किसान को इस राशि के लिए साहूकार के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

यह है कारण

समर्थन मूल्य पर सरसों व चने की खरीद के लिए कड़े नियम भी लागू है। समर्थन मूल्य पर जिंस बेचने के लिए किसानों को ई मित्र केंद्र पर जाकर टोकन कटवाने पड़े और निर्धारित तिथि पर ही उपज मंडी में लानी पड़ी। इसके अलावा एक दिन की अधिकतम खरीद सीमा भी तय थी। इसके चलते कुछ किसानों को तो अपनी पूरी फसल लाने के लिए दो-दो बार मंडी में आना पड़ा। इसके बावजूद अभी तक भुगतान नहीं मिलने से किसानों में निराशा है।

इनका कहना है
समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का भुगतान राज्य स्तर पर होता है। भुगतान में देरी के कारण के बारे में आलाधिकारियों ही बता सकते हैं।

महेन्द्रपाल सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीकर क्रय विक्रय सहकारी समिति