
1100 नेताओं ने जीती कुर्सी, लेकिन रखने की जगह नहीं
सीकर. सरकार ने गांव-ढाणियों के लोगों को लुभाने के लिए प्रदेश में नई पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतें ( New Gram Panchayat and Panchayat Samiti in Rajasthan ) तो बना दी, लेकिन इनके कार्यालयों का अभी कोई 'अता-पता' नहीं है। प्रदेश के 21 जिलों में पंचायत समितियों के प्रधानों (Rajastha Panchayat Election 2020) के चुनाव भी हो चुके हैं। नेताजी सियासी जंग भी जीत गए। अब व्यवस्था से जंग लड़ेंगे। प्रदेश में फिलहाल 60 से अधिक पंचायत समितियों और 1040 से ज्यादा ग्राम पंचायतों (Gram Panchayat)के कार्यालय ही नहीं हैं। इनको सरकारी स्कूल, सामुदायिक भवन और कुछ को अस्पताल की शरण लेनी पड़ रही है। कई जिलों में अभी तब बजट स्वीकृत नहीं होने से सरपंच व प्रधान को टेबल-कुर्सी तक का जुगाड़ खुद को करना पड़ रहा है।
सत्ता संग्राम और कोरोना ने अटकाया ठिकाना
प्रदेश में सत्ता संग्राम से पहले पंचायतीराज विभाग का जिम्मा पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Ex Deputy Chief Minister Sachin Pilot) के पास था। इस दौरान नई पंचायतों के भवनों को लेकर कवायद शुरू हुई, लेकिन फिर सियासी जंग छिड़ गई। मंत्रिमण्डल विस्तार नहीं होने के कारण खुद सीएम के पास यह विभाग है। कोरोना ने भी नई पंचायतों के भवन निर्माण का काम अटका दिया।
जनप्रतिनधियों का दर्द : फिर जनता को कैसे देंगे राहत?
सीकर जिले की पलसाना पंचायत समिति की नव निर्वाचित प्रधान सुनीता वर्मा का कहना है कि सरकार ने नई पंचायत समितियां बनाकर चुनाव भी करवा दिए, लेकिन अभी तक कार्यालय नहीं खोला है। ऐसे में लोगों के काम कैसे होंगे? नई पंचायत समितियों में जल्द से जल्द कर्मचारी लगाकर कार्यालय शुरू करने चाहिए।
प्रदेश के हाल : कहीं सरकारी स्कूल तो किसी ने सामुदायिक भवन को बनाया ठिकाना
बांसवाडा: 98 ग्राम पंचायतों के भवन नहीं। फिलहाल स्कूल, नवयुवक मंडल के भवन में संचालित। बांसवाड़ा पंचायत समिति का भवन भी नहीं।
बीकानेर: पूगल और बज्जू खालसा पंचायत समितियों के भवन नहीं। सामुदायिक भवन से संचालन। यहां 88 ग्राम पंचायतों को भी भवन का इंतजार। सरपंच सरकारी स्कूल के पुराने भवन, पुराने सरकारी कार्यालय में बैठने को मजबूर।
नागौर: भैरूंदा पंचायत समिति के पास अपना भवन नहीं। यहां का कामकाज फिलहाल रियांबड़ी पंचायत समिति से हो रहा है। नए प्रधान को भी यहीं बैठना पड़ेगा। वहीं 33 ग्राम पंचायतों के पास भी भवन नहीं।
अलवर: मालाखेड़ा व गोविंदगढ़ पंचायत समिति में भवन नहीं। वहीं 44 ग्राम पंचायतों को भवन का इंतजार। फिलहाल प्रधान व सरपंच किराए के भवन में काम कर रहे।
जालौर: दो पंचायत समितियां सरनाऊ व बागोडा के पास भवन नहीं। सरनाऊ समिति राजीव गांधी सेवा केन्द्र व बागोडा सरकारी स्कूल में चल रही। वहीं 33 ग्राम पंचायतों के कार्यालय नहीं।
करौली: महावीरजी व मासलपुर में पंचायत समिति भवन अभी नहीं बने। 2014 में बनी मंडरायल पंचायत समिति का भवन अब बन रहा है। ऑफिस एक स्कूल के खाली भवन में संचालित है।
अजमेर: सावर और अजमेर ग्रामीण पंचायत समिति के कार्यालय नहीं हैं। 40 ग्राम पंचायतों को भी अब तक अपना भवन नहीं मिला। सावर पंस सरकारी स्कूल भवन एवं अजनेर ग्रामीण पंस कार्यालय पंचायत ट्रेनिंग सेंटर में संचालित।
पाली : 20 ग्राम पंचायतें तो बना दी लेकिन अभी भवन आवंटन नहीं हुआ।
भीलवाडा : नवसृजित 14 ग्राम पंचायतों के कार्यालय नहीं है।
श्रीगंगानगर : नौ ग्राम पंचायतों को भवन नहीं मिला। सामुदायिक भवन से कार्यालय संचालित हो रहे हैं।
प्रतापगढ़ : तीन पंचायत समितियां दलोट, सुहागपुरा और धमोतर व 70 ग्राम पंचायतों का अपना भवन नहीं है।
बूंदी : तालेड़ा पंचायत समिति की रघुनाथपुरा ग्राम पंचायत का भवन नहीं। सरपंच अभी उच्च प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में कामकाज निपटा रही है।
दौसा : पांच पंचायत समितियों और 52 ग्राम पंचायतों को भवन का इंतजार।
टोंक : पीपलू पंचायत समिति का भवन नहीं। छह ग्राम पंचायतें राजीव गांधी सेवा केंद्रों व अन्य सरकारी दफ्तरों से संचालित।
जयपुर : मौजमाबाद, जोबनेर, माधोराजपुरा, कोटखावदा व तूंगा पंचायत समितियों व 32 ग्राम पंचायतों के भवन नहीं।
सीएम के गृह जिले के हाल भी ठीक नहीं
जोधपुर जिले की पीपाड़, केरू व धवा पंचायत समितियों को अब तक भवन नहीं मिला। यहां की 77 ग्राम पंचायतें अपने भवन के लिए संघर्ष कर रही है।
शेखावाटी में भी गांवों की सरकार कर रही संघर्ष
सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले में भी गांवों की सरकार अपने खुद के दफ्तर को लेकर संघर्ष कर रही है। तीनों जिलों में छह पंचायत समितियों व 108 ग्राम पंचायतों के पास खुद के कार्यालय नहीं है।
Published on:
14 Dec 2020 10:56 am
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