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12 गांव होने थे यूआइटी में शामिल, ग्रामीणों के विरोध पर अब सरकार करेगी फैसला

राजस्थान के सीकर शहर में यूआइटी के सीमा विस्तार के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का ब्रेकर लग गया है।

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सीकर

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Ajay Sharma

Feb 15, 2022

12 गांव होने थे यूआइटी में शामिल, ग्रामीणों के विरोध पर अब सरकार करेगी फैसला

12 गांव होने थे यूआइटी में शामिल, ग्रामीणों के विरोध पर अब सरकार करेगी फैसला

सीकर. राजस्थान के सीकर शहर में यूआइटी के सीमा विस्तार के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का ब्रेकर लग गया है। अब यूआइटी ने 12 राजस्व गांवों को यूआइटी सीमा में शामिल करने के प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने की तैयारी कर ली है। क्योंकि कई गांवों के लोग शहर में रैली निकालकर विरोध जता चुके हैं। ऐसे में यूआइटी ने भी इस मामले से सोशल डिस्टेंस बनाने की तैयारी कर ली है। दरअसल, यूआइटी की ओर से पिछले महीने हुई बैठक में भढ़ाडर, बाजौर, चैलासी, देवगढ़, हीरामल नगर, झीगर छोटी, किरडोली, मलकेड़ा, शास्त्री नगर, हर्ष, झीगर बड़ी व पीपल्या नगर को यूआइटी में शामिल करने का प्रस्ताव लिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने रैली निकालकर विरोध शुरू कर दिया था। इन गांवों की लगभग 8163 हैक्टेयर जमीन यूआइटी में शामिल होनी थी। ऐसे में इस मामले में अब निर्णय सरकार स्तर से होना है।

पहले यह प्रस्ताव भी उलझा

यूआइटी की ओर से पहले दुजोद इलाके में निजी खातेदारों की बाजार मूल्य पर जमीन खरीदकर कॉलोनी बसाने का भी प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन खातेदारों के विरोध के बाद इस प्रस्ताव को सरकार के पास भिजवाया गया था। लेकिन अभी तक सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। यूआइटी का तर्क था मेडिकल कॉलेज, खेल स्टेडियम व स्मृति वन की वजह से इस इलाके में कॉलोनी डवलप हो सकती है।


राहत भी: गोविन्द नगर व चंदपुरा योजना हो सकती है अनलॉक
शहरवासियों के लिए एक राहतभरी खबर भी है। पिछले दस साल से गोविन्द नगर व चंदपुरा आवासीय योजना राजस्व विवाद की वजह से उलझी हुई थी। लेकिन अब नियमों में शिथिलन की वजह से इन दोनों कॉलोनियों को हरी झंडी मिलने की आस है। यदि इन कॉलोनियों को अनुमति मिलती है तो एक हजार परिवारों का आशियाने का सपना पूरा हो सकता है। इसके लिए यूआइटी ने भी तैयारी शुरू कर ली है। लेकिन हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

ग्रामीणों का इसलिए विरोध

यूआइटी सीमा में शामिल नहीं होने के पीछे ग्रामीणों के अपने तर्क है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी लोगों की ओर से खेती की जा रही है। ऐसे में यूआइटी में शामिल नहीं किया जाएगा। कुछ ग्रामीणों को यूआइटी के जमीन अधिग्रहण करने का भय है। जबकि यूआइटी सचिव पहले ही दावा कर चुके है कि बिना ग्रामीणों की सहमति के किसी भी खातेदार की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। यूआइटी की जमीन अधिग्रहण की कोई योजना भी नहीं है।


इधर, कुछ परिवारों को फैसले का इंतजार
कई कॉलोनाइजर्स की ओर से यूआइटी सीमा में शामिल होने वाले गांवों में कॉलोनी बसा दी। लेकिन भूमि रूपान्तरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। अब ऐसे लोगों की ओर से यूआइटी में आवेदन करने की तैयारी कर ली। लेकिन मामला सरकार स्तर पर जाने की वजह से ऐसे लोगों का इंतजार बढ़ गया है।


इनका कहना है

यूआइटी सीमा में 12 नए गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव जल्द राज्य सरकार को भिजवाया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम निर्णय होगा। दुजोद इलाके में निजी खातेदारों की जमीन लेकर कॉलोनी बसाने के मामले का फैसला भी सरकार स्तर पर होना है।
इन्द्रजीत सिंह, सचिव, यूआइटी, सीकर