
सीकर. ये तो डॉक्टर बन गया...। मरीजों की लाइन लगी रहती है...। खूब पैसे कमाता होगा...। आजकल चिकित्सकों के बारे में यह सब सुनना सामान्य बात है, क्योंकि ऐसा हो भी रहा है, मगर इस मामले में राजस्थान के सीकर जिले के छोटे के गांव आकवा निवासी डॉ. मुकेश भास्कर मिसाल हैं। मिसाल इसलिए कि इन्होंने मरीजों की निशुल्क सेवा करने के लिए निजी अस्पताल की नौकरी छोड़ दी।
जानिए 33 साल के डॉ. मुकेश भास्कर की जिंदगी के बारे में...
-मुकेश भास्कर ने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से वर्ष 2002 से 2008 तक एमबीबीएस की पढ़ाई की।
-फिर 2009 में उदयपुर चले गए। वहां आरएनटी मेडिकल कॉलेज से वर्ष 2012 तक एमएस (सर्जरी) पूरी की।
-इसके बाद मुकेश भास्कर ने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। वहां से न्यूरो सर्जन की डिग्री ली।
-जनवरी 2017 इन्होंने जयपुर के अपेक्स अस्पताल तीन लाख रुपए प्रतिमाह (36 लाख सालाना) के पैकेज में ज्वाइन किया।
-निजी अस्पताल ज्वाइन करने के बाद महंगे इलाज के चलते मरीजों को परेशान होते देख मुकेश भास्कर ने फ्री सेवा की ठानी।
-अगस्त 2017 में डॉ. मुकेश भास्कर ने अपेक्स अस्पताल की नौकरी छोड़ दी और घर पर मरीजों को निशुल्क देखना शुरू कर दिया।
-इस बीच डॉ. भास्कर का जयपुर के एसएमएस अस्पताल के न्यूरो सर्जन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर सरकारी नौकरी लग गई।
-सरकारी नौकरी लगने के बाद भी डॉ. भास्कर एसएमएस अस्पताल के पीछे स्थित अपने निवास पर मरीजों को निशुल्क देखते हैं।
डॉ. पत्नी भी दे रही डॉ. पति का साथ
न्यूरो सर्जन डॉ. मुकेश भास्कर की पत्नी मुक्ता मील भी पेशे से डॉक्टर हैं और एसएमएस मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं। पति मुकेश की इस निशुल्क सेवा से कायल होकर वह भी घर आने वाले मरीज को बिना पैसे देखने लगी हैं। सरकार से मिलने वाली तनख्वाह से दोनों मिलकर रोगियों के लिए दवा उपलब्ध करा रहे हैं। दोनों का वादा है कि उनकी यह सेवा ताउम्र जारी रहेगी।
बहनोई ने दी सरकारी सेवा की सलाह
न्यूरो सर्जन डा. मुकेश घर बैठकर रोगियों की सेवा करते रहे। इसके बाद इनके बहनोई शिवराज जो खुद डॉक्टर हैं ने सलाह दी कि निजी के अलावा वे सरकारी सेवा में जाकर और भी ज्यादा मरीजों की संभाल कर सकते हैं। इसके बाद घर पर रोगियों की सेवा करते हुए परीक्षा में शामिल हुए और जयपुर एसएमएस अस्पताल में ही ज्वाइन कर लिया। अब दिन में ड्यूटी के दौरान यहां अपनी सेवा देते हैं और इसके बाद घर जाकर इनके पास आने वाले मरीजों को निशुल्क उपचार मुहैया कराते हैं।
Updated on:
06 Oct 2017 03:32 pm
Published on:
06 Oct 2017 01:24 pm
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