
सावन स्पेशल: 600 साल पुराना है अजीतगढ़ का शिव मंदिर, लोकनाथ महाराज ने की थी तपस्या
सीकर/अजीतगढ़. राजस्थान के सीकर जिले के अजीतगढ़ कस्बे के उत्तर में अरावली की पहाडिय़ों के बीच स्थित शिव मंदिर 600 साल से आस्था का केंद्र है। जो अब आध्यात्मिक पर्यटन का रूप लेता जा रहा है। हरियाली की ओट में मेघों के मल्हार के बीच सावन के महीने में यहां सैंकड़ों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। जो भगवान शिव का जल व दूध से अभिषेक के अलावा रुद्राभिषेक व अन्य धार्मिक आयोजन भी करते हैं।
लोकनाथ महाराज ने की थी तपस्या
मंदिर के महंत लक्ष्मण दास महाराज ने बताया कि शिव मंदिर में करीब 600 साल पहले वर्षों पहले लोकनाथ महाराज द्वारा तपस्या की गई थी। जिसके चलते यह तपोस्थली भी कहलाती है। पद्मश्री पुरुस्कृत कृषि वैज्ञानिक जगदीश पारीक, जगदीश कुमावत व मोहम्मद शरीफ गौरी ने बताया कि लोकनाथ महाराज ने ही अपनी तपस्या के दौरान यहां शिवलिंग की स्थापना कराई थी। तभी से यह मंदिर सिद्ध माना जाता है।
10 साल पहले बसा शिव परिवार, बांध से बहता है झरना
मंदिर में 10 साल पहले शिव परिवार की मूर्तियां प्रतिष्ठित की गई है। इस दौरान जन सहयोग से मंदिर का निर्माण व बगीचे का विकास किया गया। करीब 100 सीढ़ी चढऩे पर दर्शन देने वाले भगवान शिव के पास आम यात्रियों के अलावा वन सोमवार करने वाली महिलाएं भी काफी संख्या में उपवास के लिए पहुंचती है। सावन में कावडिय़े दूर दराज के तीर्थ स्थलों से जल लाकर भी भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मंदिर के पीछे 70 साल डॉ श्याम सुंदर ने जन सहयोग से एक बांध का निर्माण करवाया था। जो बरसात में झरने की तरह फूटने पर विहंगम दृश्य उत्पन्न करता है।
मंदिर की व्यवस्था संभाले हुए हैं लक्ष्मण दास महाराज
अरावली पर्वतमाला पर बने शिव मंदिर की पूजा अर्चना एवं व्यवस्था का कार्य कई सालों से लक्ष्मण दास महाराज संभाल रहे हैं। महाराज का कहना है कि यह मंदिर काफी सालों पुराना है । अब धीरे-धीरे जन सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार हो चुका है। यहां लोग सुबह शाम शिव भगवान के दर्शन करते हैं। यहां विशेष रूप से सावन के महीने में चहल-पहल बनी रहती है। साथ ही सावन के महीने में कस्बे समेत क्षेत्र के लोग यहां शिव भगवान का अभिषेक करने आते हैं। कई लोग यहां गोठ व सवावणी प्रसाद भी करते हैं।
Published on:
17 Jul 2022 01:03 pm
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