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Khatu Shyam Baba: बसंत पंचमी का पर्व खाटू श्याम बाबा के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन राजस्थान के सीकर जिले स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाली बसंत पंचमी पर बाबा श्याम का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इस अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालु खाटूधाम पहुंचते हैं और बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन करते हैं।
बसंत पंचमी के दिन बाबा श्याम का विशेष पीत श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में बाबा के शीश का पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पूरे मंदिर को पीले फूलों से सजाया जाता है। पीला रंग बसंत ऋतु, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए ये दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होता है।
बसंत पंचमी का दिन श्याम नगरी ही नहीं, बल्कि पूरे श्याम जगत के लिए खास होता है। बाबा श्याम के मनोहारी पीले स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे वर्ष इस दिन का इंतजार करते हैं। यही कारण है कि बसंत पंचमी पर खाटूधाम में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
खाटू श्याम बाबा को महाभारत काल के वीर बर्बरीक के रूप में जाना जाता है। बर्बरीक महाबली भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र थे। वे बहुत शक्तिशाली योद्धा थे। जब महाभारत का युद्ध होने लगा, तो बर्बरीक ने अपनी माता अहिलावती से युद्ध में जाने की अनुमति मांगी। माता ने शर्त रखी कि वे हमेशा हारने वाले का साथ देंगे। बर्बरीक ने यह वचन स्वीकार कर लिया। भगवान श्रीकृष्ण को यह पता था कि अगर बर्बरीक युद्ध में उतरे, तो युद्ध का परिणाम बदल सकता है।
भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक के पास पहुंचे और उनसे शीश दान में मांगा। श्रीकृष्ण का विराट रूप देखकर बर्बरीक ने प्रसन्नता से अपना सिर दान कर दिया। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश को युद्ध भूमि के पास एक ऊंची जगह पर रख दिया, जिससे वे पूरा युद्ध देख सकें। बाद में भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा खाटू श्याम बाबा के रूप में होगी और वे अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
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Updated on:
20 Jan 2026 02:50 pm
Published on:
20 Jan 2026 02:50 pm
