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खाप जैसा फैसला : झुंझुनूं के नरहड़ में जातीय पंचायत ने सुनाया ये तुगलकी फरमान, पूरा परिवार दहशत में

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नरहड़ गांव में जातीय पंचों ने एक परिवार के खिलाफ पांच साल जाति से बाहर करने का फरमान सुनाया था।

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Khap Panchayat

मनोहर विश्नोई
नई दिल्ली/झुंझुनूं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जातीय पंचायतों का खौफ और फरमान बदस्तूर जारी है। ऐसा ही फरमान पिछले दिनों राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नरहड़ गांव में बुलाई गई जातीय पंचायत ने सुनाया। जातीय पंचों ने 15 नवंबर को एक परिवार के खिलाफ पांच साल जाति से बाहर करने का फरमान सुनाया था। इसकी पालना नहीं होने से खफा जातीय पंचों ने 15 दिसंबर को पिछले फैसलों पर अमल नहीं होने से एक बार फिर पंचायत बुलाने का एलान कर दिया है।

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जातीय पंचायत की इस बैठक के खिलाफ लडक़े के परिवारजनों ने सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय सहित राज्य के डीजीपी और झुंझुनूं एसपी को पत्र लिखकर इसके फरमान और अगली पंचायत पर रोक की मांग की है। बावजूद इसके जातीय पंच फिर से पंचायत बुलाने पर आमादा है। खाप पंचायत की तर्ज पर 120 गांवों के पंच मिलकर समाज के मसलों पर फैसला लेते हैं।

यह दिल्ली और मुंबई में रहने वाले एक ही जाति के दो परिवारों के आपसी विवाद का है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि दिल्ली निवासी शेख समाज के लडक़े का निकाह राजस्थान मूल की मुंबई निवासी लडक़ी से 2010 में हुआ था। दोनोंं के छह साल की बेटी भी है। लेकिन पिछले 8 नवंबर को दोनों के बीच अनबन हो गई और लडक़ी अपने पिता के साथ मुंबई लौट गई।

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इस घटना के कुछ दिनों बाद लडक़ी पक्ष की अपील पर बुलाई गई खाप की तरह कौमी पंचायत ने लडक़े के परिवार को दोषी मानते हुए 5 साल के लिए जाति बाहर करने का हुकुम सुना दिया। साथ ही जातीय पंचों ने फैसले की पालना नहीं होने पर कड़ा दंड देने की बात कही। इस फैसले को लडक़े के परिवाजनों ने मानने से इनकार किया तो जातीय पंचों ने फैसले की पालना करवाने के लिए 15 दिसंबर को फिर से पंचायत बुलाने का फैसला किया है।

पंचायत के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार
इस पंचायत में ज्यादा ज्यादा लोगों आने के लिए बाकायदा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है। नरहड़ शरीफ चल और कौम बचाओ के नारों के साथ अगली पंचायत में पहुंचने की अपील की जा रही है। पिछली बैठक के फैसले को फेसबुक पर लाइव भी किया गया था।


पंचों ने जूतों पर खड़े होकर माफी मांगने को कहा
लडक़े के बड़े भाई ने नाम नहीं छापने की शर्त पर पत्रिका को बताया कि समाज ने एक तरफा फैसला लेकर हमारे परिवार को 5 साल के लिए जाति से बाहर कर दिया। हमारे परिवार पर हमले करवाए जा रहे हैं। जातीय पंचों ने हम लोगों को जूतों पर खड़े होकर माफी मांगने को कहकर जलील किया।


करेंगे अपील
पत्रिका ने लडक़ी और उनके पिता से भी बात की तो उनका कहना है कि बदचलनी का आरोप लगाकर लडक़े वालों ने धमकी दी और तलाक दे दिया। लडक़ी के पिता का कहना है कि हमने इस मसले को जातीय पंचों को बताया और उसके बाद कौमी पंचायत ने उस परिवार को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ फैसला सुनाया। अब हम तलाक देने के मामले को लेकर न्यायालय में अपील करेंगे।


हमें ऐसी किसी खाप या जातीय पंचायत की जानकारी नहीं मिली है। कई जाति, बिरादरी के लोग इक_ा होते रहते हैं। खाप पंचायत की कोई शिकायत मिलेगी तो जरूर कार्रवाई करेंगे। -दिनेश कुमार यादव, झुंझुनूं कलेक्टर

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