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Good News: अब हमारे यहां लगेगा स्टील प्लांट, खुलेगी आर्थिक तरक्की की राह

रंग ला रही पत्रिका मुहिम, ईपीएस और लोगो भीमजबूत चट्टानों के नीचे दफन 'लोहेÓ से लिखी जाएगी विकास की गाथा नीमकाथाना क्षेत्र के दीपावास में जल्द लगेगा स्टील प्लांटप्रतिवर्ष 2 लाख टन स्टील उत्पादन की होगी क्षमता उदयपुर की कंपनी देख रही जगह, करीब 180 हैक्टेयर में होगी लीज स्थापितखुले उद्योग तो मिले सीकर को संजीवनी

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सीकर

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Mukesh Kumawat

Apr 28, 2022

Good News: अब हमारे यहां लगेगा स्टील प्लांट, खुलेगी आर्थिक तरक्की की राह

Good News: अब हमारे यहां लगेगा स्टील प्लांट, खुलेगी आर्थिक तरक्की की राह

मुकेश कुमावत

Good News: सीकर/नीमकाथाना. भरपूर कच्चा माल होने के बाद भी औद्योगिक लिहाज से पिछडऩे वाले सीकर जिले के लिए बड़ी खुश खबरी है। नीमकाथाना इलाके में जल्द स्टील प्लांट की स्थापना होगी। इससे इलाके के दस हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। प्लांट के शुरू होते ही पहाडिय़ों के नीचे दबे लोहे से जल्द ही विकास की गाथा का एक नया अध्याय भी शुरू हो सकेगा। इलाके में आयरनओर (लोह अयस्क) प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। उदयपुर की एक कंपनी ने दीपावास में स्टील प्लांट लगाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है। दीपावास में कंपनी को 180 हैक्टेयर आयरन ओर की लीज आवंटित हो चुकी है। स्टील प्लांट लगने के बाद सीकर जिले के युवाओं के लिए रोजगार की नई राहें भी खुलेगी। लादीकाबास इलाके में स्थित आयरनओर पत्थर को माफियां अवैध रूप से दूसरी जगह सप्लाई कर रहे है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। हालांकि खान विभाग की ओर से माफिया के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई कर डंपरों को जब्त करने का दावा भी किया गया।

डायवर्जन की मिल चुकी है अनुमति

दीपावास में आवंटित होने वाली आयरओर की लीज के लिए भारत सरकार से प्रथम डायवर्जन की अनुमति को हरी झंडी मिल चुकी है। कंपनी इसके अलावा राजस्थान में और कहीं पर भी प्लांट लगा सकती है। लेकिन सूत्रों के अनुसार नीमकाथाना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ा होने पर वरियता दीपावास को ही ज्यादा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इतने क्षमता के प्लांट की होगी स्थापना

राज्य सरकार की ओर से आवेदक कंपनी को मंशा पट्टा जारी खानन पट्टा स्वीकृति के 2 वर्ष की अवधि में राजस्थान में बेनिफिकेशन प्लांट एवं सविंदा निष्पादन की तिथि से अधिकत 5 वर्ष की अवधि में 2 लाख टन प्रति वर्ष क्षमाता का स्टील प्लांट की स्थापना की जाएगी। वही खनन पट्टे की अवधि 50 वर्षों तक रहेगी।

इसलिए कंपनी ने दिखाया उत्साह:

हमारे यहां बेहतर गुणवत्ता का का लोह अयस्कनीमकाथाना इलाके की लादीकाबास की पहाडिय़ों में काफी मात्रा में आयरन का भंडार है। सरकार की इन पहाडिय़ों पर कई वर्षों से नजर है। यहां पर लोह अयस्क का बड़ा भंडार है। पहाडिय़ों पर पड़े छोटे-छोटे पत्थर भी काफी वजनी है। लोह अयस्क का बड़ा भंडार होने पर सरकार इन पहाडिय़ों से लोहा निकालने की तैयारी में जुट गया है। अच्छी गुणवत्ता का लोह अयस्क होने पर सरकार का इस क्षेत्र में बड़ा प्लांट लगाने का मानस बना रखा है। इस क्षेत्र की ऊपरी सतह पर ही अच्छी गुणवत्ता का लोह अयस्क है। पहाड़ी की गहराई में लोह अयस्क की गुणवत्ता और बढ़ती जाती है। पहाडिय़ों की बड़ी चट्टानों में लोह अयस्क साफ तौर दिखाई देता है।

नीमकाथाना में दो नए औद्योगिक क्षेत्र बनेंगे

नीमकाथाना में दो नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। इससे झालरा में स्वीकृत रीको इलाके में बड़ी इंडस्ट्री आने से औद्योगिक विकास होगा। साथ ही इलाका डवलप होगा तथा लोगों को रोजगार मिलेगा। गौरतलब है कि झालरा के पास से डीएफ सीसी की लाइन गुजरने व न्यूडाबला स्टेशन नजदीक होने पर यहा बनने वाले रीको में टायल्स बनाने की बड़ी इंडस्ट्री स्थापित होने की पूरी संभावना है। अगर सरकार इलाके में गैस पाइप लाइन का सपना पूरा हो तो टाइल्स का बड़ा हब भी सीकर जिला बन सकता है।-

एक्सपर्ट व्यू: लोहा अयस्क से राजस्थान में औद्योगिक क्रांति की प्रबल संभावना

नीमकाथाना क्षेत्र के आसपास वन भूमि में लोहा अयस्क की प्रचुर खनिज संपदा विद्यमान है। एक अनुमान के अनुसार एक हजार करोड़ मैंटन से भी अधिक लोहा अयस्क के भंडार वन क्षेत्रों में स्थित हैं। यदि सरकार इनका विदोहन करने के लिए सुगम नीति बनाकर औद्योगिक प्लांट स्थापित करने में सहयोग प्रदान करे तो नीमकाथाना के साथ राजस्थान की भी आर्थिक तरक्की की राह खुल सकती है। वर्तमान में गैर वन क्षेत्रों में बागोली,नारदा, नानगवास, तोंदा, जमालपुर, दूदवा, प्रीतमपुरी एवं टोडा दीपावास के पास सरकार ने खनन पट्टे स्वीकृत कर रखे हैं। जिनमें प्रतिवर्ष 9926 मैंण्टन का नाम मात्र का उत्पादन होता है,जो कि सम्पूर्ण गुजरात एवं महाराष्ट्र भेज दिया जाता है। यातायात लागत अधिक होने से इनका उत्पादन कम हो रहा है। टोडा दीपावास का बड़ा खनन पट्टा खनन विकास में विशेष सहयोग दे सकता है। यदि सरकार वन क्षेत्रों को भी खनन क्षेत्र करते हुए औद्योगिक भूमि एवं सस्ती ऊर्जा जैसी रियायत प्रदान करे तो 10-20 हजार लोगों को रोजगार एवं 15-20 हजार करोड़ रुपए की सालाना आय अर्जन की जा सकती है।( जैसा कि उद्योगपति एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर भवानीशंकर शर्मा ने पत्रिका संवाददाता को बताया )