
सीकर. राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में मनमर्जी से जांच करवाने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की बड़ी कार्रवाई ने चिकित्सक समुदाय में हलचल मचा दी है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम ने सोमवार कल्याण अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल और निजी लैब संचालक डॉ. बनवारी लाल चौधरी उर्फ बी लाल को हिरासत में लिया। हिरासत में लेने के बाद टीम दोनो चिकित्सक को लेकर जयपुर के लिए रवाना हुए। सूचना फैलते ही चिकित्सकों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। कल्याण अस्पताल के सभी चिकित्सक आउटडोर और वार्डों का बहिष्कार कर बाहर आ गए। मरीजों में अफरा-तफरी मच गई। चिकित्सक नहीं होने से ट्रोमा में पहुंची एम्बुलेंस 108 को भी मरीज को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ा। ट्रोमा यूनिट के बाहर चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। इधर घटना के विरोध में चिकित्सक संगठनों की बैठक हुई। बैठक में अरिस्दा, आइएमए, राजमैस, आरएमसीटी सहित चिकित्सक संगना के पदाधिकारी शामिल हुए। चिकित्सकों को हिरासत में लेेने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप से एक कार्मिक कल्याण अस्पताल पहुंचा। जहां आरजीएचएस में गडबड़ी से संबंधित तिथियों को लेकर चिकित्सकों की उपिस्थति का रेकार्ड लेकर गया। गौरतलब है कि फरवरी माह में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की ओर से वर्ष 2023, 2024 के बाद अब वर्ष 2025 पर्चियों की ऑडिट की गई थी।
चिकित्सकों के विरोध में मंगलवार देर शाम जिला क्लब में संयुक्त चिकित्सक संघर्ष समिति के बैनर तले बैठक हुई। बैठक में अरिस्दा, आईएमए, राजमेस, उपचार, आरएमसीटीए के घटक सहित अन्य चिकित्सक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सर्व सम्मति से मंगलवार को कल्याण अस्पताल में ओपीडी का बहिष्कार किया जाएगा। अस्पताल में ट्रोमा यूनिट यथावत चलेगी। जिला मुख्यालय के सभी निजी अस्पतालों में सुबह बारह बजे तक सभी प्रकार की चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहेगी। बैठक में आईएमए के संयुक्त सचिव डॉ. सुनील गोरा, अरिस्दा के डॉ. अटल चौधरी, आरएमसीटीए के डॉ. शिवपाल कुड़ी, प्राइवेट हास्पिटल एसोसिएशन सीकर के अध्यक्ष डॉ. रामदेव चौधरी सहित चिकित्सक शामिल हुए। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीज नहीं देखने के निर्णय पर सहमति बनी। अरिस्दा, आरएमसीटी सहित चिकित्सक संगठनों ने मंगलवार को सुबह आठ से दोपहर बजे तक ओपीडी बहिष्कार का निर्णय कर अस्पताल प्रबंधन को ज्ञापन दिया। प्रबंधन की ज्ञापन को लेकर उच्चाधिकारियों सहित प्रबंधन को सूचना दी।
गिरफ्तारी के विरोध में चिकित्सकों ने आरोप लगाया कि बिना पूरी जांच के चिकित्सकों की हिरासत में लेने कार्रवाई की गई है और इससे चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। चिकित्सकों ने इस कार्रवाई को दमनात्मक बताते हुए बड़े आंदोलन की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चिकित्सकों ने कहा कि योजना की खामियों को चिकित्सकों पर थोपा जा रहा है। विभागीय जांच से पहले चिकित्सक को हिरासत में लेना गलत है। जब संबंधित चिकित्सक पूछताछ के लिए मुख्यालय जा रहे तो अब हिरासत में लेने की क्या जरूरत पड़ गई।
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम सोमवार सुबह मेडिकल कॉलेज परिसर पहुंची। टीम में शामिल लोगों ने कार्रवाई से पहले अपनी पोजिशन ले ली। इसके बाद टीम लीडर ने दूसरी मंजिल पर बने मकान का दरवाजा खटखटाया और मरीज दिखाने की बात कही। जैसे ही चिकित्सक बाहर निकला टीम ने हिरासत में लिया। महज कुछ देर में टीम दोनो चिकित्सकों को अपने साथ जयपुर ले गई। जहां से उन्हें न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने जैसी अगली कार्रवाई की जाएगा। योजना को नुकसान पहुंचाने के नेटवर्क में शामिल अन्य चिकित्सक और लैब कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच चल रही है। दोषी सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
आरजीएचएस योजना के तहत बिना आवश्यकता के जांचें लिखी जा रही थीं और निजी लैब से सांठगांठ कर सरकारी बजट को चूना लगाया जा रहा था। मामले में सात चिकित्सकों को दोषी माना। स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी की अनुशंसा के बाद राजस्थान मेडिकल एज्यूकेशन सोसाइटी ने निलम्बन के आदेश जारी कर मुख्यालय जयपुर कर दिया था। मामले की जांच रतनगढ़ चौकी की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को सौंप दी थी। एसओजी ने कल्याण अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल सहित तीन चिकित्सकों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मरीजों को बिना देखे ही फर्जी परामर्श पर्चियां बनाई जाती थी। इन पर्चियों के आधार पर अनावश्यक और महंगी जांचें, खासकर एमआरआई, लिखी जाती थी। कई मामलों में सामान्य जांच को “कॉन्ट्रास्ट एमआरआई” दिखाकर अधिक बिल बनाया गया। इतना ही नहीं, एक ही जांच को कई बार दिखाकर 5-6 रिपोर्ट अपलोड कर अतिरिक्त क्लेम लिया गया। चिकित्सक की अनुपस्थिति के दिनों में भी फर्जी पर्चियां बनाकर जांचें दर्शाई गईं। कई बार मरीज की असली रिपोर्ट की तारीख बदलकर पोर्टल पर अपलोड कर भुगतान हासिल किया गया। कुछ मामलों में निजी चिकित्सकों के रेफरल को बदलकर सरकारी चिकित्सक के नाम से दर्शाया गया। यहां तक कि कई मरीजों को पता भी नहीं था कि उनके नाम से क्लेम उठाए जा रहे हैं।
चिकित्सकों को हिरासत में लेना पूरी तरह से गलत है। इसके विरोध में मंगलवार दोपहर बारह बजे तक निजी अस्पतालों में सभी प्रकार के चिकित्सकीय कार्य पूरी तरह ठप रहेंगे।
डॉ. सुनील गोरा, संयुक्त सचिव, आईएमए सीकर
Published on:
05 May 2026 11:37 am
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
