
माधव सागर तालाब,गनेड़ीवाल जोहड़ा
रविन्द्र सिंह राठौड़
rajasthanpatrika.com
सीकर के दो पर्यटक स्थलों की जल्द सूरत बदलेगी। पर्यटन विभाग ने पर्यटक स्थलों के संवर्धन व सौन्दर्यीकरण कार्यों के लिए 2 करोड़ 5 लाख 18 हजार 44 रुपए का प्रस्ताव तैयार मुख्यालय भेजा है। इन पर्यटक स्थलों में सीकर का माधव सागर तालाब एवं फतेहपुर शेखावाटी स्थित गनेड़ी वालों का जोहड़ा शामिल हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत सीकर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों के संवर्धन व विकास के लिए विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश जारी किए थे। इसके बाद जिला कलक्टर अविचल चतुर्वेदी ने जिले के दो प्रमुख पर्यटक स्थलों का चयन किया है। पर्यटक स्थलों के चयन के बाद पर्यटन विभाग ने नगर परिषद सीकर एवं फतेहपुर नगर पालिका से दोनों पर्यटक स्थलों का तकमीना तैयार कराया है।
वित्तीय स्वीकृति मिलने का इंतजार
पर्यटन विभाग मुख्यालय से अनुमति मिलने तथा वित्तीय स्वीकृति जारी होने के बाद पर्यटक स्थलों के संवर्धन व विकास के कार्य शुरू होंगे। अनुमानित राशि के तहत होने वाले कार्यों में संरक्षण कार्य चूना प्लास्टर, लाईग काटा, चारदीवारी, मरम्मत, पत्थर, आराम स्थल व कैफेटेरिया स्थल का निर्माण, जल संरक्षण व पार्क सुधार, पार्क में बच्चों के लिए क्रीड़ा स्थल, गैलेरी निर्माण सहित फतेहपुर जोहड़े में ट्री गार्ड के साथ पौधा रोपण, साफ-सफाई, मरम्मत, इंटरलॉक ब्लॉक सहित कई कार्य होंगे।
अकाल राहत के रूप में बना तालाब
माधव सागर (बड़ा तालाब) के नाम से पहचाना जाने वाला यह तालाब राव राजा माधव सिंह की ओर से संवत 1956 तथा 1899 ई में अकाल राहत कार्य के रुप में बनवाया गया था। जिसका निर्माण राव राजा कल्याण सिंह ने 56 हजार रुपए की लागत से कराया था। जो गोलाकार तथा अष्टकोणिय आकृति में बना हुआ है। इसके चारों ओर भवनों के साथ घाट बने हुए है। पश्चिम में हरदयाल घाट, दक्षिण में युवरानी त्रिलोक्य राज लक्ष्मी के नाम पर राजघाट, पूर्व में जनाना घाट और उत्तर में कल्याण घाट बने हुए है। इन घाटों का इसके घाटों का प्रवेश द्वार त्रिपोलियां के रुप में जाना जाता है। घाटों व खंभों के बीच 11 चौपड़ऩुमा चारों ओर सीढ़ियां बनी हुई है। वहीं इतिहासकार प्रदीप पारीक ने बताया कि फतेहपुर शेखावाटी में स्थित गनेड़ी वालों के जोहड़े का निर्माण सेठ राम गोपाल गनेड़ीवाल ने कराया था। जोहड़े की जमीन के साथ राव राजा माधो सिंह ने रामगोपाल की छतरी के तहत 500 बीगा जमीन बीहड़ के लिए भी छोड़ी थी। वर्तमान में यह संपत्ति बद्रीनारायण देवस्थान ट्रस्ट के नाम पर हैं। जोहड़ा का निर्माण विक्रम संवत 1960 के लगभग हुआ था। इसके निर्माण के पीछे का उद्देश्य जल संरक्षण के साथ साथ स्थानीय जनता को रोजगार उपलब्ध करवाना था।
ऐसे बदलेगी सूरत...
1. माधव सागर तालाब हेरीटेज संरक्षण कार्य चूना प्लास्टर, लाईग काटा, चारदीवारी, मरम्मत, पत्थर आदि कार्य- 55 लाख रुपए
2. माधव सागर के पास आगुंतक आराम स्थल व कैफेटेरिया स्थल निर्माण कार्य-30 लाख रुपए
3. माधव सागर के पास जल संरक्षण व पार्क सुधार कार्य-25 लाख रुपए
4. पार्क में बच्चों के लिए क्रीड़ा स्थल, गैलेरी निर्माण कार्य- 10 लाख रुपए
5. गनेड़ी वालों का जोहड़ा में ट्री गार्ड के साथ पौधारोपण, साफ-सफाई, मरम्मत, इंटरलॉक ब्लॉक, पानी की व्यवस्था आदि 8518044 रुपए
Published on:
25 Jun 2022 01:27 pm
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