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इस सरकारी स्कूल में व्हाट्स एप पर होती है हाजिरी, अंग्रेजी में होती है पढ़ाई

सीकर/ शिश्यूूं- पत्रिका के नींव अभियान से प्रेरित एक सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल अब पूरा हाईटेक हो रहा है। यहां बच्चों की आकर्षक डे्रस के साथ अंग्रेजी स्पोकन की व्यवस्था पहले ही शुरू की जा चुकी है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Nov 07, 2019

इस सरकारी स्कूल में व्हाट्स एप हाजिरी, अंग्रेजी में होती है पढ़ाई

इस सरकारी स्कूल में व्हाट्स एप हाजिरी, अंग्रेजी में होती है पढ़ाई


सीकर/ शिश्यूूं- पत्रिका के नींव अभियान से प्रेरित एक सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल अब पूरा हाईटेक हो रहा है। यहां बच्चों की आकर्षक डे्रस के साथ अंग्रेजी स्पोकन की व्यवस्था पहले ही शुरू की जा चुकी है। बच्चों की हाजरी व रिपोर्ट भी व्हाट्स एप के जरिए अभिभावकों को पहँुचाई जा रही है। यही नही बच्चों की हाईटेक पढ़ाई के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी ने प्रोजेक्टर की खरीद व स्कूल को ऑनलाइन करने के लिए वेबसाइट की कवायद भी शुरू कर दी है। मामला रूपपुरा- सुखपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का है। जहां स्टाफ ने नींव अभियान के तहत भामाशाहों के सहयोग से इस मुहिम को शुरू किया है।

स्कूल बना व्हाट्स एप ग्रुप, अभिभावक मेम्बर
स्कूल में बच्चों के अभिभावकों से जुड़ाव के लिए भी हाईटेक तकनीक अपनाई जा रही है। शिक्षक स्कूल के नाम का व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर अभिभावकों को उसका मेंबर बनाया गया है। जिसमें स्कूल की छुट्टी, एसएमसी की बैठक व अन्य सार्वजनिक सूचना मैसेज के जरिए भेजी जाती है। जबकि बच्चों की उपस्थिति व गतिविधि की रिपोर्ट अभिभावकों को व्यक्तिगत व्हाट्स एप पर भेजी जा रही है।

अंग्रेजी व कम्प्यूटर पढ़ रहे बच्चे
स्कूल भले ही आठवीं तक है लेकिन यहां बच्चों को इंग्लिश स्पीकिंग व कम्प्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बिजली की समस्या के चलते शिक्षक यहां लैपटॉप से बच्चों को कम्प्यूटर का ज्ञान दे रहे है।

टाई-बेल्ट और आईकार्ड भी
स्कूल में बच्चों को प्रधानाध्यापकसहित सभी गुरूजनों ने मिलकर अपनी तनख्वाह में से सभी बच्चों को आकर्षक यूनिफ ॉर्म, टाई-बेल्ट व आईकार्ड बच्चों को दिए गए जिससे बच्चे लिहाज से निजी स्कूलों के बच्चों से कमतर नही लगते है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक रामचरण शर्मा इसकी टीम सुरेश कुमार ऑला, संतरा, कमला वर्मा, संतोष मीणा, श्रीराम पारासर, ज्योति शर्मा, सहित शिक्षक स्कूल को बेहतर व हाईटेक ढंग से चलाने की कोशिश कर रहे है। नई डे्रस व अंग्रेजी स्पोकन की व्यवस्था लागू हो गई है। प्रोजेक्टर से पढ़ाई व वेबसाइट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

छोटा-सा गांव का स्कूल आज शिक्षा के नवाचार व आचरण से एक अनूठी मिशाल पेश करता दिख रहा है। विद्यालय विकास की लिए हमेशा भामाशाह, ग्राम पंचायत आगे रहते है। बोर्ड परीक्षा का परिणाम भी श्रेष्ठ रहा है। विद्यालय में शेक्षणिक कार्य अच्छा होने से विद्यालय के छात्र भी पुर्ण तरह से अनुशासन के नियमों का पालन करते है।

निजी विद्यालय की तरह चलते है नियम
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कहने को तो सरकारी विद्यालय हैं लेकिन हर एक नियम निजी विद्यालय की तरह चलते हैद्ध निजी विद्यालय की तरह छात्रों के आइडेंटी कार्ड , शिक्षकों के आईडी कार्ड, कक्षा प्रतिनिधि कार्ड, छात्रसंसद का घटन, दैनिक डायरी, शिक्षक अभिभावक बैठक, सहित कई नियम लागू है। इसके साथ ही हर एक कक्षा कक्ष में श्यामपट्ट भी लगाए गए है। मीड-डे मील के तहत बच्चों को स्वादिष्ट और गुणवतापूर्ण भोजन परोसा जाता है। विद्यालय में बेस्ट छात्रओं के लिए स्टेडेंट ऑफ द ईयर अवार्ड भी दिया जाता है जिससेे दुसरे छात्र शिक्षा के प्रति ओर जागरूक हो सके। इसी के साथ स्कूल में तीन दिन प्रार्थना स्थल पर हारमोनिय पर प्रार्थना करवाई जाती है। तथा तीन दिन इंग्लिश प्रतिज्ञा एवं प्रार्थना करवाई जाती है।