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राजस्थान का एकमात्र जिला जहां बेटो से भी ज्यादा बेटियां, जानिए अन्य जिलों की स्थिति

बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान पत्रिका व विभिन्न संगठनों की ओर से चलाए जा रहे अभियान अब रंग लाने लगे हैं बालिका लिंगानुपात में हुए सुधार में पहले नंबर पर बांसवाड़ा 1003

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बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान पत्रिका व विभिन्न संगठनों की ओर से चलाए जा रहे अभियान अब रंग लाने लगे हैं बालिका लिंगानुपात में हुए सुधार में पहले नंबर पर बांसवाड़ा 1003

राजस्थान का एकमात्र जिला जहां बेटो से भी ज्यादा बेटियां, जानिए अन्य जिलों की हकीकत

पूरण सिंह शेखावत, सीकर.

बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान पत्रिका व विभिन्न संगठनों की ओर से चलाए जा रहे अभियान अब रंग लाने लगे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पीसीटीएस आंकड़ों (लाइव बर्थ) के अनुसार 2018 में शिशु लिंगानुपात में सुधार करने में प्रदेश में सीकर जिला आठवें पायदान पर है। पहले स्थान पर बांसवाड़ा और दूसरे स्थान पर चूरू जिला है।
वहीं दिसंबर 2018 में सीकर जिले में एक हजार बेटों पर ९५८ बेटियों ने जन्म लिया। एक जनवरी 2018 से दिसंबर 2018 तक जिले में २२७७० बेटे व २१८०६ बेटियां पैदा हुई। कुल ४४५७६ बच्चे पैदा है। इसके अनुसार जिले का लिंगानुपात प्रति हजार बेटों पर 9५८ तक पहुंच गया है। विभाग की माने तो सीकर जिले में सुधार की गति इसी तरह रही तो जल्द ही बेटों व बेटियों की संख्या बराबर हो जाएगी। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार 2018 में प्रति हजार बेटों पर १९ बेटियों की संख्या बढ़ी।


कौनसा जिला किस पायदान पर
बालिका लिंगानुपात में हुए सुधार में पहले नंबर पर बांसवाड़ा 1003, दूसरे पर चूरू 99२, तीसरे पर हनुमानगढ़ 982, चौथे स्थान पर बाड़मेर 976 , पांचवे स्थान पर जालोर 966 , छठे पायदान पर राजसमंद 965, सातवें पर जौधपुर 96 4, आठवें पर सीकर 958 , नवें पर चितौडगढ़ व टोंक 956 वहीं दसवें स्थान पर धौलपुर 955 रहा है। सबसे खराब स्थिति में कोटा जिले की रही है जहां पर बालिका लिंगानुपात 901, सवाईमाधोपुर व डूंगरपुर में 905 रही है। इसलिए आया सुधार सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी ने बताया कि पिछले पांच वर्ष में जन्म लेने वाले जीवित जन्म शिशुओं के आंकड़ों पर किए गए अध्ययन के अनुसार बालिका लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बेटिया अनमोल है, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान तथा पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण जागरूकता पैदा हुई है। बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी बदलाव आ रहा है लेकिन बेटियों के प्रति भेदभाव पूर्णतया समाप्त करने के लिए अभी और जागरूकता लानी होगी।


यह है प्रदेश में स्थिति
प्रदेश में वर्ष 2017 में 13 लाख 83 हजार 99 बच्चे पैदा हुए जिनमें से सात लाख 11 हजार 551 लडके व 6 लाख 71 हजार 548 लड़कियां पैदा हुई। इसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 943 था। इसी तरह वर्ष 2018 में जनवरी से दिसंबर तक 13 लाख 55 हजार 486 बच्चे पैदा हुए जिनमें से छह लाख 95 हजार 944 लडक़े व छह लाख 59 हजार 542 लड़कियां पैदा हुई जिसके अनुसार जीवित जन्म शिशु दर बालिका लिंगानुपात 948 है। आंकड़े बताते हैं प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार हो रहा है। चाइल्ड सेक्स रेशियो में हुए सुधार के माने में शेखावाटी में झुंझुनूं की स्थिति सबसे खराब है। यहां अभी प्रति हजार बेटों पर 57 बेटियां कम पैदा हो रही हैं।


पांच साल में इतने बच्चे पैदा हुए (लाइव बर्थ)


वर्ष कुल बच्चे बालक बालिका
2014 48290 25127 23163 922
2015 45060 23233 21827 939
2016 43216 23680 22536 952
2017 46736 24100 22638 939


शेखावाटी में 2018 में इतने बेटों पर जन्मी बेटियां
चूरू जिला
बेटा 17255
बेटी 17115
कुल 34370
लिंगानुपात 99२
सीकर जिला
बेटा 22770
बेटी 21806
कुल 44576
लिंगानुपात 958
झुंझुनूं जिला
बेटा 14785
बेटी 13946
कुल 28731
लिंगानुपात 943


सीकर फैक्ट फाइल

वर्ष 2017
24100 लडके
22638 लडकी
46738 कुल
939 सेक्स रेशियो
19 अंक बढ़े


बालिका शिक्षा में भी बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना नए सिरे से शुरू की। इसके तहत हुए नवाचारों से समाज में जागृति तो आई, लेकिन अभी भी करने को बहुत कुछ है। शेखावाटी में सबसे बड़ा बदलाव बालिका शिक्षा को लेकर आया है। यहां की बेटियां पढ़ाई के साथ रोजगार में बेटों से आगे निकल रही है। बेटी सशक्तिकरण की सफलता का यह अच्छा संकेत है। बेटियों को कुपोषण से मुक्त कराने की दिशा में प्रयास करने होंगे। - प्रमिला सिंह, काउंसलर


संगठन की ओर से बेटियों के स्वास्थ्य व पोषण को लेकर सीकर जिले में कई सर्वे किए है। सरकार को अब बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। वही समाज की भी जिम्मेदारी है कि पढ़-लिखकर मुकाम हासिल करने वाली बेटियों को प्रोत्साहित किया जाए। पिछले पांच वर्षो में शेखावाटी में लिंगानुपात का स्तर भी काफी हद तक सुधरा है। -पूजा चौधरी