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सुनहरे गेहूं के बाद अब चमकेगा ‘ब्लैक व्हीट’

सीकर जिले में पहली बार काले रंग के गेहूं की खेती बनी मिसाल

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सीकर

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Gaurav Saxena

Jun 06, 2020

सुनहरे गेहूं के बाद अब चमकेगा ‘ब्लैक व्हीट’

सुनहरे गेहूं के बाद अब चमकेगा ‘ब्लैक व्हीट’

सीकर. कोरोना वैश्विक महामारी के काल ने किसानों को भी अपनी खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदलने पर मजबूर कर दिया है। इसकी बानगी है कि सीकर जिले के रघुनाथगढ़ इलाके के प्रगतिशील किसान ने इस बदलते हालात में खेती का पैटर्न बदलकर विकास की नई इबारत लिख दी। बकौल किसान काले गेहूं की खेती कर सामान्य गेहूं से 10 गुना अधिक भाव है। इसे देखते हुए आस-पास के किसानों ने पारंपरिक फसलों की बजाय अधिक मुनाफे वाली खेती की तैयारी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि सीकर जिले में रबी सीजन में करीब चार लाख 87 हजार किसान खेती करते हैं।


इसलिए अलग है यह गेहूं
किसान सोहनलाल ने बताया कि काले रंग के गेहूं को फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट मोहाली की ओर से पेटेंट कराया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार एक किलोग्राम सामान्य गेहूं में एनथ्रोसाइनिंग की मात्रा 5 से 15 प्रति मिलियन होती है। जबकि काले गेहूं में यह 40 से 140 प्रति मिलियन तक होती है। हार्ट, कैंसर, डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों की रोकथाम करता है. इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक है। इस कारण काला गेहूं कैंसर के मरीजो के लिए बेहतर विकल्प माना गया है।


18 किलो गेहूं में 5.5 क्विंटल उत्पादन
रघुनाथगढ इलाके गांव के डेढ बीघा खेत में बुवाई के लिए पंजाब के मोहाली से 18 किलो काले रंग का गेंहू का बीज 120 रुपए किलो के हिसाब से खरीदकर बोया था। जिसके बदले उन्हें साढे पांच क्विंटल गेहूं का उत्पादन हासिल हुआ। बकौल किसान शुगर फ्री व ओषधि गुणों वाले इस गेहूं की बाजार में मांग भी अधिक है और दाम भी। इस समय बाजार में सामान्य गेहूं प्रति किलो 20 से 25 रुपए किलो बिकता है जबकि काले गेहूं के दाम प्रति किलो 150 से 250 रुपये मिल रहे है। खास बात यह है कि इस गेहूं की खेती में कोई रोग नही लगता है।


इसलिए निर्णय
किसान ने बताया कि प्रतिकूल मौसम में खेतों में रात- दिन एक करने वाला किसान अपनी उपज का दाम भी तय नही कर पाता। गेहूं बिक भी गया तो भुगतान के लिए परेशान होना पडता है। इसे देखते हुए उनके परिवार के एक व्यक्ति ने काले रंग के गेहूं की बुवाई की सलाह दी। इसे देखते हुए उन्होने दिसम्बर में मोहाली से बीज लाकर बुवाई की।

काले या बैंगनी रंग वाले इस गेहूं के पौधे सामान्य पौधे की तरह ही होते हैं। हालांकि अभी इसका रकबा कम है, लेकिन मुनाफे को देखते हुए इसका रकबा बढऩे की संभावना है।

एसआर कटारिया, उपनिदेशक कृषि