सचिन माथुर सीकर. एक हिट फिल्म है सोल्जर नेवर ऑन होली डे। यानी सिपाही कभी छुट्टी पर नहीं होता। इसी वाक्य को पिपराली निवासी सेवानिवृत बीएसएफ इंस्पेक्टर रामेश्वरलाल बगडिय़ा भी चरितार्थ कर रहे हैं।
सीकर. एक हिट फिल्म है सोल्जर नेवर ऑन होली डे। यानी सिपाही कभी छुट्टी पर नहीं होता। इसी वाक्य को पिपराली निवासी सेवानिवृत बीएसएफ इंस्पेक्टर रामेश्वरलाल बगडिय़ा भी चरितार्थ कर रहे हैं। जो मार्च महीने में पद से तो सेवानिवृत हो गए, पर 'सेवा से निवृत' नहीं हुए। समाज के साथ अब वे बेजुबान पक्षियों की सेवा में भी जुटे हैं। इसके लिए उन्होंने पिपराली की श्रीश्याम गोशाला में सात मंजिल का एक अनूठा पक्षी घर तैयार करवाया है। जो देखने में जितना आकर्षक है, पक्षियों के लिए उतना ही सुविधाजनक है। करीब 80 फीट के इस पक्षी घर में दो हजार पक्षियों के आवास व दाना- पानी की व्यवस्था की गई है। जहां पक्षियों का आवागमन दिनभर रहने लगा है।
गुजरात से बुलाए कारीगर, साढ़े छह लाख रूपए खर्च
रामेश्वर लाल का कहना है कि बेजुबान पक्षी मनुष्य पर ही निर्भर है। यह सोच वे काफी समय से पक्षियों के लिए कुछ करना चाहते थे। उन्होंने टीवी के अलावा गुजरात में ऐसे अनूठे पक्षी घरों को देखा था। जिन्हें यहां भी बनवाने का प्रयास किया तो कारीगर नहीं मिले। ऐसे में गुजरात से ही कारीगर बुलवाकर उन्होंने भामाशाहों के सहयोग से पक्षीघर तैयार करवाया।
सात मंजिल में डेढ- डेढ फीट के 840 घर
पक्षी घर सात मंजिल का है। इसमें जानवरों से बचाए रखने के लिए पक्षियों के ऊंचाई पर 840 घर बनाए गए हैं। बकौल रामेश्वर लाल हर पक्षी घर डेढ फीट लंबा- चौड़ा है, जिसमें पक्षी आराम से आवास के साथ प्रजनन कर सकता है।
पक्षियों को दाना- पानी पहुंचा रहे ग्रामीण
श्रीश्याम गोशाला समिति अध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने बताया कि पक्षी घर में पक्षियों की आवाजाही दिनभर रहने लगी है। सुबह व शाम को ये संख्या ज्यादा रहती है। पक्षी घर में पक्षी आने पर ग्रामीणों ने भी उनके दाना- पानी की व्यवस्था शुरू कर दी है। इसके लिए पक्षी घर के नीचे ही मिट्टी का एक स्थल बनाया गया है।
निशुल्क तैयार कर रहे खिलाड़ी
रामेश्वरलाल पक्षियों की सेवा के साथ पिपराली में खिलाडिय़ों की खेप भी निशुल्क तैयार कर रहे हैं। इसके लिए गौशाला के पास ही एक मैदान तैयार कर वे करीब 50 खिलाडिय़ों को सुबह दौड़, ऊंची व लंबी कूद, बेटल वॉर आदि की तैयारी करवाते हैं। शाम को वालीबॉल मैदान में भी खिलाडिय़ों को अभ्यास करवाते हैं। बकौल रामेश्वर लाल वे अपना जीवन सेवा को ही समर्पित करना चाहते हैं।
इनका कहना है:
सेना सेवा का भाव सिखाती है। उसी भाव को आजीवन जिंदा रख समाज के लिए कुछ करते रहने की इच्छा है।
रामेश्वरलाल, सेवानिवृत बीएसएफ इंस्पेक्टर।