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राजस्थान में बिना बजट के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना तोड़ रही दम

ना ही तो सरकार ने आदर्श बनाने के लिए कोई अतिरिक्त बजट आवंटित किया व ना ही कोई अतिरिक्त विकास कार्य करवाएं।

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सीकर. फतेहपुर. केन्द्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही सांसद आदर्श ग्राम योजना की तर्ज पर प्रदेश में चलाई गई मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना सिर्फ आदर्श नाम तक सिमट कर रह गई है। ना ही तो सरकार ने आदर्श बनाने के लिए कोई अतिरिक्त बजट आवंटित किया व ना ही कोई अतिरिक्त विकास कार्य करवाएं। ऐसे में योजना धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ रही है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना की शुरूआत की थी। योजना के अनुसार प्रत्येक विधायक को प्रत्येक वितीय वर्ष में एक ग्राम पंचायत को आदर्श पंचायत के रूप में चुनना था। इसी तरह अब तक दो बार आदर्श ग्राम पंचायतों का चयन हुआ है। आदर्श ग्राम पंचायत योजना के तहत 2016 में चुनी गई पंचायतों के विकास के लिए 20 लाख रूपये का अतिरिक्त बजट दिया था। वर्ष 2017 में चुनी गई ग्राम पंचायतों के विकास के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली 20 लाख रूप्ये की राशि नहीं मिली। हाल ही में ग्रामीण विकास मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने विधायकों को पत्र लिखकर इस वर्ष भी आदर्श ग्राम पंचायत योजना के तहत ग्राम पंचायत के चयन करने के लिए लिखा गया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर बिना बजट के ग्राम पंचायत आदर्श कैसी होगी। बिना बजट के आदर्श ग्राम पंचायत योजना दम तोड़ रही है।


बिना बजट के कैसे आदर्श बने पंचायतें
मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना में शामिल ग्राम पंचातयों की वीडीपी में बहुत सारे कार्य लिए जा रहे हैं। जलदाय विभाग, विद्युत विभाग सहित कई अन्य विभागों में स्थानीय स्तर पर उक्त कार्य करवाने के लिए बजट नहीं होता है। उक्त कार्य करवाने के लिए मुख्यालय में पत्राचार किया जाता है। ऐसे में उक्त कार्यों के लिए बजट ना आकर सिर्फ कागज पत्र ही चलते रहते है। सरकार इसके लिए उक्त विभागों को कोई बजट नहीं जारी कर रही है। ऐसे में कार्य सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाते है। उक्त संबंध में जिला परिषद से कोई वर्जन ले सकते है। व आदर्श ग्राम पंचायतों की सूची लेकर साथ लगा सकते है।


विभागों में नहीं है सामंजस्य, ना कोई मॉनीटरिंग
मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना की तहसील स्तर से लेकर जिला स्तर व प्रदेश स्तर तक कोई प्रभावी मॉनीटरिंग नहीं है। इसके कारण विलेज डवलपमेंट प्लान में लिए कार्य भी पूर्ण नहीं होते है। विलेज डवलपमेंट प्लान में शामिल किए गए कार्य विभिन्न विभागों से संबंधित होते है, जबकि इसकी मॉनीटरिंग पंचायत समिति करती है। ऐसे में दूसरे विभागों से कोई सामंजस्य नहीं रहता है। इसके अभाव में वीडीपी में शामिल कार्य सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाते है।

प्लान में लिए कार्य भी अभी तक नहीं हुए पूर्ण
मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना के तहत गत दो वर्षो में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अब तक दो ग्राम पंचायतों का चयन हुआ है। जिले में कुल 16 ग्राम पंचायतों को मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना के तहत विकसित करना था। विधायक की अभिशंषा पर चुनी गई पंचायतों में ग्राम सभा की बैठक कर विलेज डवलपमेंट प्लान तैयार किया जाता है। उक्त प्लान में सभी कार्य सम्मलित किए जाते जो ग्राम पंचायत को आदर्श बनवाने के लिए करवाएं जाने है। हालात यह है कि उक्त प्लान के तहत लिए गए कार्य भी अभी तक पूर्ण नहीं हुए है। ऐसे में नई पंचायत के चयन पर कार्य कब तक पूर्ण होंगे।