
अजय शर्मा, सीकर.
बिना अनुमति बसी कॉलोनियों के जरिए सीकर के बिल्डरों ने यूआईटी को 150 करोड़ का झटका दे दिया है। इसका खुलासा खुद यूआईटी के सर्वे में हुआ है। बिना भूमि रूपान्तरण के बसी इन कॉलोनियों के विकास पर भी ब्रेक लग गया है। इनमें से ज्यादातर कॉलोनी कृषि भूमि पर बसी है। इस कारण यूआईटी अमला भी पट्टे जारी नहीं कर पा रहा है। दूसरी तरफ अवैध कॉलोनियों में बसे 15 हजार से अधिक परिवारों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। इधर, यूआईटी अमला भूखण्ड मालिकों को नोटिस भी जारी कर रहा है।
यहां बसी है अवैध कॉलोनी
राजस्व गांव नानी के कंवरपुरा रोड, पालवास रोड, श्यामपुरा रोड, सालासर रोड क्षेत्र में 60 हैक्टेयर, समर्थपुरा, पिपराली क्षेत्र में 20 हैक्टेयर, राधाकिशनपुरा-झुंझुनुं बाईपास क्षेत्र में 30 हैक्टेयर, जगमालपुरा, चंदपुरा, सबलपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग 20 हैक्टेयर भूमि पर अवैध कॉलोनी बसी हुई हैं।
खातेदारी भूमि पर नहीं मिल रहीं सुविधाएं
शहर में एससी-एसटी की जमीन का भी जमकर खरीद-बेचान हुआ। लोगों ने स्टाम्प के जरिए ही इन जमीनों को खरीद कर कॉलोनी काट दी। भूमी की खातेदारी मूल खातेदार के नाम से दर्ज होने के कारण इन कॉलोनियों में सडक़, पानी व रोशनी जैसी सुविधाएं डलवप नहीं हो पा रही है।
अवैध कॉलोनियों से नुकसान का गणित
यूआईटी के अधिकारियों का कहना है कि यदि इसी भूमि के खातेदारों द्वारा ले-आऊट प्लान तैयार कराकर नगरीय विकास विभाग द्वारा प्लान अनुमोदित कराने के बाद पट्टे जारी किए जाते तो नगर परिषद, यूआईटी व राज्य सरकार को लगभग 50 करोड़ प्रीमियम व विकास शुल्क के रुप में मिलते। वहीं लगभग पांच करोड़ रुपए पंजीयन शुल्क व स्टाम्प ड्यूटी के प्राप्त होते। यूआईटी के सर्वे में सामने आया कि सामान्य वर्ग की खातेदारी की करीब 300 हैक्टेयर भूमि भी नगरीय विकास शुल्क व पंजीयन शुल्क जमा कराए बिना ही बेच दी दी गई। इससे भी सरकार को लगभग 100 करोड़ की हानि हुई है।
जारी हो चुके हैं नोटिस...
यूआईटी ने पिछले दिनों सर्वे कराया था। इसमें सामने आया कि लगभग 130 हैक्टेयर जमीन पर सीकर में अवैध कॉलोनी बसी हुई हैं। यदि कॉलोनी बसाते समय प्रिमियल, विकास शुल्क व भूमि रूपान्तरण सहित अन्य से लगभग 150 करोड़ रुपए की आमदनी होती। अवैध कॉलोनियों में बसे लोगों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। -रामनिवास जाट, सचिव, यूआईटी, सीकर
Published on:
07 Feb 2018 02:44 pm
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