
सीकर. सीकर शहर में जाम लगने का मुख्य कारण लोक परिवहन व निजी बसों का शहर के अंदर से गुजरना है। लोक परिवहन बसों व निजी बसों के लिए शहर के बाहर बने तीन बस स्टैंड व एक बस स्टॉप पर जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से कोई सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई है। ऐसे में यहां पर यात्रियों व राहगीर ठहरते ही नहीं है। इन बस स्टैंडों पर छाया, स्टैंड, शौचालय, पेयजल सहित अन्य किसी भी प्रकार की सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई है। ऐसे में निजी बस व लोक परिवहन बस संचालक यहां पर अपनी बसें नहीं लगाते हैं। जबकि जयपुर रोड पर कृषि उपज मंडी के बाहर बनाए गए बस स्टैंड को भामाशाह व खाटूश्यामजी रूट की बसों की यूनियन ने अपने खर्च पर सभी सुविधाएं उलब्ध करवा रखी है। ऐसे में यहां हमेशा यात्रियों की कतार लगी रहती है और हर बस यहीं से सीट टू सीट फुल होकर चलती है।
यातायात पुलिस सख्ती बरते तो भी निजी बसों व लोक परिवहन बसों के शहर में प्रवेश पर पाबंदी लग सके और सात साल पहले बनाए गए इन बस स्टैंडों का कायाकल्प हो सकेगा। लोसल, धोद, खूड़, नागौर, डीडवाना, तोषीणा, अजमेर, पुष्कर, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर सहित अन्य रूटों पर जाने वाली बस ऑपरेटर यूनियन भी यात्रियों की इन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में यदि नगर परिषद, जिला प्रशासन और बस ऑपरेटर यूनियन के पदाधिकारी इन बस स्टैंडों पर सुविधाएं विकसित करें तो यहां से भारी यात्रीभार मिल सकता है। इन बस स्टैंडों पर बसें खड़ी करने और यात्रियों के लिए सुविधाएं तैयार करने के लिए पर्याप्त जगह है, जिससे कि यात्रियों की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही शहर के लोगों व राहगीरों को दिनभर लगने वाले जाम से भी निजात मिल सकेगी।
गौरतलब है कि करीब सात साल पहले यातायात प्रबंधन समिति की बैठक में तत्कालीन कलक्टर नरेश कुमार ठकराल ने शहर के बाहर चार बस स्टैंड सबलपुरा पावर हाउस के पास, बड़ा तालाब, पिपराली चौराहा और कृषि उपज मंडी के बाहर बनवाए थे। इन बस स्टैंडों के लिए उस दौरान जगह तय कर यहां पर ब्लॉ लगाए गए थे लेकिन इसके अलावा कोई सुविधाएं विकसित नहीं की गई थीं। यहां तक कि पेयजल, टीनशेड, कुर्सियां, शौचालय तक नहीं बनाए गए जिससे कि यहां पर बसें नहीं रूक रही है। सबसे ज्यादा परेशानी महिला यात्रियों व बच्चों को होती है। उन्हें धूप में खड़ा होना पड़ता है और बैग व लगेज तक रोड पर गंदगी में रखना पड़ रहा है। ऐसे में इन बस स्टैंडों पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए जिला प्रशासन व नगर परिषद को पहल करनी चाहिए। यदि जिला प्रशासन चाहे तो भामाशाहों व जनसहयोग से भी इन बस स्टैंडों को विकसित किया जा सकता है।
निजी बसें, लोक परिवहन बसें व रोडवेज बसें इन निर्धारित बस स्टैंडों पर नहीं रूक रही है। लोक परिवहन व निजी बसें शहर के अंबेडकर सर्किल, बजरंग कांटा, जयपुर रोड, राणी सती चौराहा, बस डिपो तिराहा, जयपुर रोड, कल्याणजी मंदिर, नवलगढ़ पुलिया, मारू स्कूल, फतेहपुर रोड आदि जगहों से होकर गुजर रही है। ऐसे में शहर में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसका खामियाजा शहर की आम जनता, राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं जिला प्रशासन, नगर परिषद, यातायात पुलिस और सीकर पुलिस इस पुरानी व्यवस्था को सुधारने के लिए भी कोई कदम नहीं उठा रही है। जिससे कि शहर की मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति बनी हुई है। सुबह आठ से रात आठ बजे तक शहर में प्रवेश नहीं कर सकती लोक परिवहन व निजी बसें- भारी वाहनों और निजी बसों, लोक परिवहन बसों पर सुबह 8 से रात आठ बजे तक शहर में नहीं आने का नियम बनाया हुआ है, लेकिन यातायात पुलिस व जिला प्रशासन की घोर लापरवाही ने इस नियम को बस संचालकों व ड्राइवरों ने मखौल बना रखा है। निजी बसें व लोक परिवहन बसें लगातार शहर के भीतर से होकर गुजर रही है।
Published on:
01 Jun 2025 01:31 pm
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