
शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थी बोले- प्रदेश में कब होगी रीट
सीकर.
REET in Rjasthan : शिक्षक बनने का सपना पालने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीद अब रीट भर्ती ( REET Bharti ) की मांग के साथ हिलौरे लेने लगी है। सरकार अब तक पिछली रीट के जरिए हुई तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती ( Third Grade Teacher Recruitment ) के लंबित मामलों में उलझी हुई तो प्रदेश में रीट परीक्षा की मांग भी उठने लगी है। बेरोजगारों का कहना है कि सीटेट सहित अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं का आयोजन हर साल हो रहा है। ऐसे में सरकार को इस साल भी पात्रता परीक्षा का आयोजन कराना चहिए। बीएड व एसटीसी प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि सरकार को हर साल शिक्षक भर्ती का फॉर्मूला सरकार को लाना होगा, इससे भर्तियों के सिस्टम में भी पारदर्शिता आएगी। गौरतलब है कि प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर तृतीय श्रेणी प्रथम व द्वितीय लेवल में शिक्षकों की नियुक्ति होती है। इस मामले में बेरोजगारों का प्रतिनिधिमंडल जल्द शिक्षा राज्य मंत्री से भी मुलाकात करेगा।
प्रदेश में अब तक चार रीट परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अनुसार 31 जुलाई 2011, 9 अक्टूबर 2012, 7 फऱवरी 2015 और 11 फऱवरी 2018 को रीट परीक्षा का आयोजन हुआ था। इन परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर शिक्षक भर्ती हुई है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही भर्तियों का पैर्टन बदल जाता है। पिछले 15 सालों की बात करें तो पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा का आयोजन हुआ था। इसके बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू होने के बाद जिलास्तर पर रीट के बाद परीक्षाओं का आयोजन हुआ। पिछली कांग्रेस सरकार की यह भर्ती काफी विवादित रही। इसके बाद भाजपा ने रीट व बीएड के अंकों के आधार पर भर्ती कराई। यह फार्मूला भी न्यायालयों में काफी उलझा। लेकिन अब ज्यादातर अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी है। अब कांग्रेस सरकारी इसी मंथन में जुटी है कि अब कौनसे पैर्टन से शिक्षक भर्ती परीक्षाओं का आयोजन कराया जाए।
रीट के बाद एक और परीक्षा की मांग
शिक्षक भर्ती के लिए अलग से RPSC के माध्यम से परीक्षा आयोजित कराने की भी युवा मांग कर रहे हैं। कई जिलों के युवाओं का कहना है कि पहले की तरह 60 फीसदी राजस्थान का सामान्य ज्ञान जोड़ा जाए और उसकी मेरिट प्रदेश स्तर पर जारी की जाए। पात्रता परीक्षा में भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग, विधवा महिलाओं को छूट का मामला लंबित है।
सरकार का गणित: हर रीट से बचत
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( Rajasthan Board of Secondary Education ) की ओर से होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा फायदे का सौदा ही साबित हुई है। इस परीक्षा में औसतन आठ लाख से अधिक अभ्यर्थी आवेदन करते है। ऐसे में बोर्ड को आर्थिक तौर पर मदद मिलती है। दूसरी तरफ रीट पास अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा संख्या में होने पर निजी क्षेत्र में भी अच्छे अवसर
मिल सकेंगे।
इसलिए होनी चाहिए हर साल परीक्षा
हर साल औसतन 80 हजार से अधिक अभ्यर्थी बीएड व बीएसटीसी अंतिम वर्ष की परीक्षा पास कर शिक्षक बनने की कतार में शामिल होते है। इनमें से ज्यादातर रीट के पेपर पैटर्न के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में पहली बार में अच्छा स्कोर बनाना इनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण काम होता है। ऐसे युवाओं का कहना है कि यदि हर साल पात्रता परीक्षा का आयोजन हो तो उनको काफी मदद मिल सकती है।
हर साल होनी चाहिए रीट परीक्षा ( REET in 2019 )
ब अखिल भारतीय स्तर पर सीटेट का आयोजन हर साल होता है तो फिर रीट परीक्षा हर साल क्यो नहीं हो सकती है। इससे हर साल शिक्षक भर्ती हो सकेगी। इससे युवाओं को आर्थिक तौर पर भी काफी फायदा मिलेगा। -उपेन यादव, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ
Published on:
09 Aug 2019 02:46 pm
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