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जूता छुपाई की रस्म बनी आफत: 11 हजार की जिद में फेरों के बाद टूट गई शादी, बिना दुल्हन लौटी बारात

सीकर

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Arvind Rao

Jan 21, 2026

Sikar Marriage Controversy

Sikar Marriage Controversy (Photo-AI)

Sikar News: राजस्थान के सीकर जिले में एक शादी समारोह उस वक्त विवाद में बदल गया, जब हंसी-मजाक की पारंपरिक रस्म जूता छुपाई ने गंभीर रूप ले लिया। बात इतनी बढ़ी कि मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया और अंत में दूल्हा-दुल्हन दोनों ने एक-दूसरे से शादी करने से इनकार कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि शादी की सभी रस्में और फेरे पूरे हो चुके थे और दोनों पक्ष इस समारोह पर करीब 40 से 50 लाख रुपए खर्च कर चुके थे। घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। बारात विदा होने की तैयारी में थी। फेरे पूरे हो चुके थे और अंतिम रस्में चल रही थीं।

इसी दौरान दूल्हे की सालियों ने परंपरा के अनुसार, जूता छुपाई की रस्म निभाई। आमतौर पर इस रस्म में हंसी-ठिठोली के साथ नेग लिया जाता है। लेकिन यहां सालियों ने जूता लौटाने के बदले 11 हजार रुपए की मांग रख दी।

सालियां अपनी मांग पर अड़ गईं

वर पक्ष की ओर से बातचीत कर 5,100 रुपए या उससे कुछ अधिक देने की बात कही गई, लेकिन सालियां अपनी मांग पर अड़ गईं। उनका कहना था कि पूरे 11 हजार रुपए मिलेंगे, तभी दुल्हन की विदाई होगी। शुरुआत में मजाक लग रही यह बात धीरे-धीरे बहस में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया और बात प्रतिष्ठा से जुड़ती चली गई।

दूल्हे के कर दी ये डिमांड

विवाद बढ़ने पर दूल्हा भी गुस्से में आ गया। उसने सालियों की मांग के जवाब में अचानक पांच लाख रुपए नकद और एक बुलेट बाइक की मांग रख दी। दूल्हे ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई, तो वह बिना दुल्हन के बारात वापस ले जाएगा। दूल्हे की इस मांग से लड़की पक्ष सकते में आ गया। शादी का माहौल देखते-देखते टकराव में बदल गया।

दुल्हन ने लिया बड़ा फैसला

मौके पर मौजूद बुजुर्गों और रिश्तेदारों ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की। काफी देर तक बातचीत और समझाइश चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसी बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दुल्हन अंजू जाखड़ ने बड़ा फैसला ले लिया। उसने दूल्हे के व्यवहार और दहेज जैसी मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद दुल्हन अंजू जाखड़ थाने पहुंची और दूल्हे व उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई। उधर, दूल्हे के पिता ने भी थाने में शिकायत दी कि उनके बेटे और बारात को जबरन रोका गया और बंधक जैसा व्यवहार किया गया। दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने की समझाइश

पुलिस ने समझाइश और काउंसलिंग के जरिए मामला सुलझाने का प्रयास भी किया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बढ़ी कड़वाहट के कारण कोई सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार, दूल्हा और दुल्हन दोनों ने एक-दूसरे से शादी करने से इनकार कर दिया। बारात बिना दुल्हन के ही लौट गई।

क्या कहना है लोगों का

स्थानीय लोगों का कहना है, इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों से गलतियां हुईं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि एफआईआर में कई बातें बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं, जिससे सुलह की संभावना खत्म हो गई। जो शादी खुशी और उत्सव का कारण होनी चाहिए थी, वह पुलिस केस और रिश्तों की टूटन में बदल गई।

यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ जाती है। जूता छुपाई जैसी रस्में आपसी प्रेम, सम्मान और हल्के-फुल्के मजाक के लिए होती हैं। जब यही रस्में मोलभाव, अहंकार और दहेज की मांग का रूप ले लेती हैं, तो उनका असली मकसद खत्म हो जाता है। सीकर की यह शादी इसी सोच और दिखावे की भेंट चढ़ गई, जहां रस्में रिश्तों से भारी पड़ गईं।

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