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Success Story: आर्मी कैप्टन अर्चना ने चार साल की बेटी व परिवार संभालते हुए पास की आरएएस परीक्षा

शादी व बच्चों के बाद परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाओं के लिए अर्चना नई प्रेरणा है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Jul 15, 2021

इंडियन आर्मी में कैप्टन अर्चना ने मां बनने के बाद पास की आरएएस परीक्षा

इंडियन आर्मी में कैप्टन अर्चना ने मां बनने के बाद पास की आरएएस परीक्षा

सीकर. शादी व बच्चों के बाद परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाओं के लिए अर्चना नई प्रेरणा है। इंडियन आर्मी से शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 5 साल सर्विस के बाद कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त अर्चना बुगालिया ने चार साल की बेटी व परिवार संभालते हुए पहले प्रयास में आरएएस परीक्षा पास की है। अर्चना ने आरएएस परीक्षा में 55 वीं रैंक हासिल की है। वो भी एक बेटी व परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए। अर्चना का कहना है कि सच्चे मन से किसी लक्ष्य को तय कर अगर मेहनत की जाए तो कोई भी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। गौरतलब है कि 10 वीं कक्षा अर्चना ने डूंडलोद मंडी के सरकारी स्कूल से और कक्षा 11 व 12 की पढ़ाई सीकर के मारू स्कूल से पास की थी।


4 साल की बेटी की परवरिश के साथ जीता मुकाम
मार्च 2012 में आर्मी ज्वांइन करने करने के बाद झुंझुनूं निवासी अर्चना ने तीन साल चंडीगढ़ और 2 साल पूणे में पोस्टिंग रही। उसके बाद 2015 में शादी और मार्च 2017 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेवानिवृत्ति ले ली। इस बीच परिवार की जिम्मेदारी और बेटी की सार-संभाल के साथ पढ़ाई की। आरएएस परीक्षा का नोटिफिकेशन आने के तीन महीने पहले ही पढ़ाई शुरू की। जयपुर में किराए पर रूम लेकर 6 महीने आरएएस परीक्ष के लिए कोचिंग ली। परीक्षा से पहले कलाम एकेडमी जयपुर से हरी सर और विवेक पारीक का अच्छा मार्गदर्शन मिला। स्नातक उर्तीर्ण करने के बाद वर्तमान में अर्चना साइक्लॉजी से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं।


लक्ष्य को पाने के लिए इमानदारी से करे मेहनत
इधर, सब इंस्पेक्टर के पद पर चयनित रूपाराम ने दो साल की कड़ी मेहनत के बाद पहले ही प्रयास में आरएएस परीक्षा में 370 वीं रैंक हासिल कर एक नया मुकाम हासिल किया है। सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यग्रहण करने के लिए रूपाराम को 22 जुलाई तक का समय मिला है। इसी बीच आरपीएससी ने मंगलवार देर रात आरएएस भर्ती 2018 का परिणाम घोषित कर खुशी को दोगुना कर दिया। रूपाराम का कहना है कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए इमानदारी से मेहनत करने की आवश्यकता है। रूपाराम इसी मेहनत के साथ मार्च 2018 से कलाम एकेडमी से जुड़े और आज इस मुकाम तक पहुंच गए। इससे पहले वो अपने चाचा सुखराम दूण के साथ मार्बल का व्यवसाय कर रहे थे। रूपाराम ने अपने लक्ष्य तक पहुंचने का श्रेय चाचा और आरपीएस राजेश सिंवर के मार्गदर्शन को दिया है।